
Owaisi की सियासी चाल से सपा परेशान… मुंबई के बाद यूपी पर नजर
Owaisi vs Akhilesh: हैदराबाद के चारमीनार इलाके से निकलकर असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपने सियासी पैर तेजी से पसारने शुरू कर दिए हैं। पहले बिहार और अब महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता ने न सिर्फ कांग्रेस और सपा जैसे दलों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है—क्या ओवैसी यूपी के मुस्लिम बेल्ट में अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ पाएंगे?
महाराष्ट्र में AIMIM का उभार, सपा को बड़ा झटका
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में से 12 शहरों में AIMIM ने कुल 126 सीटें जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पार्टी का प्रभाव अब केवल मराठवाड़ा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और मुंबई तक फैल चुका है।
मुंबई में सपा का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने सीधी सेंध लगाई। बीएमसी चुनाव में AIMIM को 8 सीटें मिलीं, जबकि सपा सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई। गोवंडी–मानखुर्द जैसे इलाकों में AIMIM ने सपा को करारी शिकस्त दी और सभी 6 मुस्लिम बहुल वार्डों में जीत दर्ज की।
मालेगांव से संभाजीनगर तक ओवैसी का परचम
मुस्लिम बहुल मालेगांव में AIMIM किंगमेकर बनकर उभरी, जहां पार्टी ने 21 सीटें जीत लीं। वहीं संभाजीनगर (औरंगाबाद) में AIMIM मुख्य विपक्षी दल बन गई। नांदेड़ और धुले जैसे शहरों में भी ओवैसी की पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया। दिलचस्प यह रहा कि सपा के कद्दावर नेता अबू आसिम आजमी अपने ही प्रभाव क्षेत्र में पार्टी को जीत नहीं दिला सके।
सपा बनाम ओवैसी: मुंबई बना सियासी रण
बीएमसी चुनाव में मुकाबला साफ तौर पर सपा बनाम AIMIM का बन गया। ओवैसी ने अपने चुनावी भाषणों में अखिलेश यादव और अबू आसिम आजमी पर तीखे हमले किए। उनका कहना था कि मुस्लिम नेतृत्व के उभरने से सपा की राजनीति सिमट जाएगी। यही आक्रामक सियासत मुस्लिम मतदाताओं को रास आई और AIMIM को सीधा फायदा मिला।
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बिहार और महाराष्ट्र के बाद यूपी पर नजर
ओवैसी का आत्मविश्वास बिहार और महाराष्ट्र की जीत से बढ़ा है। बिहार के सीमांचल इलाके में AIMIM ने लगातार दूसरी बार 5 विधानसभा सीटें जीतकर कांग्रेस और आरजेडी को पीछे छोड़ दिया। अब उनका फोकस उत्तर प्रदेश है—खासतौर पर पश्चिमी यूपी, जहां कई सीटों पर मुस्लिम आबादी 30 से 50 फीसदी तक है।
यूपी में AIMIM की कमान शौकत अली के हाथों में है। पार्टी पंचायत चुनावों से लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव तक अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी में है।
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लेकिन यूपी में राह इतनी आसान नहीं
हालांकि, यूपी में ओवैसी की राह अब तक कठिन रही है। 2022 विधानसभा चुनाव में AIMIM ने करीब 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। संगठन की कमजोरी, स्थानीय कद्दावर चेहरों की कमी और सपा का मजबूत मुस्लिम वोटबैंक—ये सभी बड़ी चुनौतियां हैं।
AIMIM से जुड़े मुफ्ती ओसामा नदवी का कहना है कि मुस्लिम समाज अब पारंपरिक दलों से आगे बढ़कर अपनी स्वतंत्र राजनीति खड़ी करना चाहता है, और ओवैसी इसके प्रतीक बनकर उभरे हैं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस मानते हैं कि यूपी में ओवैसी का कोई ठोस जमीनी आधार नहीं है और वे अधिकतम वोट कटवा की भूमिका में ही रह सकते हैं।
महाराष्ट्र और बिहार में AIMIM की सफलता ने राष्ट्रीय राजनीति में ओवैसी को नई धार दी है। मुंबई में सपा के किले में सेंध लगाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि मुस्लिम राजनीति में वह सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं। लेकिन सवाल अब भी कायम है—क्या यही सियासी मॉडल उत्तर प्रदेश में भी चलेगा, या सपा का मजबूत मुस्लिम वोटबैंक ओवैसी की राह रोक देगा? इसका जवाब आने वाले पंचायत और 2027 विधानसभा चुनाव देंगे।
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