विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त… MP सरकार को 2 हफ्ते में फैसला करने का निर्देश

Supreme Court of India ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि वह राज्य के मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मंजूरी देने या न देने पर दो सप्ताह के भीतर स्पष्ट फैसला करे। यह मामला भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक बयान से जुड़ा है, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सामने आया था।

SIT जांच पूरी, अब राज्य सरकार की भूमिका अहम
सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि विशेष जांच टीम (SIT) अपनी जांच पूरी कर चुकी है और उसने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर करती है।

अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 196 के तहत साम्प्रदायिक नफरत फैलाने जैसे मामलों में अभियोजन की स्वीकृति राज्य सरकार से अनिवार्य होती है। इसी वजह से कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को समय-सीमा तय करते हुए फैसला लेने का निर्देश दिया।

अन्य बयानों पर भी मांगी गई रिपोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि SIT ने अपनी रिपोर्ट में विजय शाह के अन्य कथित आपत्तिजनक बयानों का उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बयानों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि इन मामलों में भी अलग से कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं।

माफी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह माफी बहुत देर से दी गई है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट विजय शाह की सार्वजनिक माफी को ‘घड़ियाली आंसू’ बता चुका है और इसे कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करार दे चुका है।

हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ मामला
गौरतलब है कि यह विवाद तब सामने आया, जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विजय शाह के बयान सार्वजनिक हुए। इन बयानों को लेकर Madhya Pradesh High Court ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे।

इसके बाद विजय शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए SIT जांच के आदेश दिए थे, साथ ही फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

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मजीठिया जमानत याचिका पर भी सुनवाई
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है। मजीठिया ने Punjab and Haryana High Court के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था।

बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया पर अहम याचिका
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने से जुड़े नियमों पर भी सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इस याचिका को भारत के चीफ जस्टिस के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। याचिका में केंद्र सरकार और Reserve Bank of India से पूरे देश के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय करने की मांग की गई है।

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बीएस येदियुरप्पा और चुनावी रजिस्टर मामलों पर भी नजर
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामले में दाखिल याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। वहीं निर्वाचन रजिस्टर की सारांश संशोधन प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर भी कोर्ट विचार करेगा।

कानूनी और राजनीतिक महत्व
विजय शाह मामला अब केवल एक आपत्तिजनक बयान का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की सीमा, सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं की जवाबदेही और कानून के समान प्रयोग जैसे मुद्दों से जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट का दो सप्ताह का निर्देश मध्य प्रदेश सरकार के लिए निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि इसी से तय होगा कि मंत्री के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलेगा या नहीं।

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