रणदीप की दमदार अदाकारी से सजी ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’, पर्दे पर दिखी दर्दनाक संघर्ष की गाथा

एक्टर से निर्माता और निर्देशन बने रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ (Swatantra Veer Savarkar) 22 मार्च के दिन सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म में रणदीप ने विनायक दामोदर सावरकर का किरदार निभाया है। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा के अलावा अंकिता लोखंडे लीड में हैं. थियेटर में देखने से पहले पढ़ें इस फिल्म का रिव्यू.

इमेज क्रेडिट: सोशल मीडिया

Movie Review: बॉलीवुड इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता रणदीप हुड्डा ने फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ (Swatantra Veer Savarkar) के जरिए निर्देशन की दुनिया में कदम रखा है। इस फिल्म का निर्देशन कर रणदीप हुड्डा ने इतिहास के पन्नों को कुरेदने की कोशिश की है। यह फिल्म भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायकों में से एक विनायक दामोदर सावरकर की जिंदगी पर बेस्ड है। 

आजादी की लड़ाई के नायकों का जब जिक्र आता है तो मौजूदा पीढ़ी महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू का ही नाम जानती है। लेकिन यह फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ गांधी और नेहरू के दौर से पहले देश की खातिर अपना सब कुछ दांव पर लगा देने वाले तमाम भूले बिसरे नायकों की दर्दनाक संघर्ष गाथा को पर्दे पर उतारती है।

क्या है ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ की कहानी

इस फिल्म की कहानी 18वीं शताब्दी के आखिरी दशक में शुरू होती है, जब देश प्लेग की महामारी से जूझ रहा था। अंग्रेजी सरकार की गुलामी में बिना मुकम्मल साधनों के देशवासी कीड़े-मकोड़ों की मौत मर रहे थे। हमने कोरोना का खतरनाक दौर देखा है, लेकिन तब तो प्लेग के शिकार लोगों को अंग्रेज जिंदा जला देते थे। उसी दौरान विनायक दामोदर सावरकर (रणदीप हु्ड्डा) के पिता दामोदर सावरकर प्लेग का शिकार हो गए और अपने परिवार की जिम्मेदारी अपने बड़े बेटे गणेश दामोदर सावरकर (अमित सियाल) व उसकी पत्नी को देकर इस दुनिया से चले गए। दामोदर ने अपने तीनों बेटों को समझाया था कि अंग्रेज बहुत शक्तिशाली हैं इसलिए उनसे लड़ने में कुछ नहीं रखा। बावजूद इसके बचपन से ही अंग्रेजों के खिलाफ विचार रखने वाले विनायक ने अपने बड़े भाई गणेश के साथ मिलकर एक गुप्त संगठन अभिनव भारत की नींव रखी, जो कि अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की वकालत करता था। सावरकर ने न सिर्फ अंग्रेजी वस्त्रों की जोरदार होली जलाई, बल्कि उनके संगठन से जुड़े तमाम युवाओं ने कई अंग्रेज अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया।

मूवी रिव्यू

सावरकर को उस दौरान आजादी के आंदोलन के मुख्य नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। अंग्रेजों को उन्हीं के दांवपेंचों से हराने का हुनर सीखने की खातिर सावरकर कानून की पढ़ाई करने की लंदन पहुंच गए। यहां श्याम जी कृष्ण वर्मा के इंडिया हाउस में लंदन में मौजूद भारतीय क्रांतिकारी इकट्ठा होते थे। उनके सहयोग से सावरकर ने अपने संगठन के सदस्यों के लिए हथियार जुटाए व बम बनाने का तरीका सीखा। उन्हीं के संगठन से जुड़े मदन लाल धींगड़ा ने लंदन में ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस के हेड कर्जन वायली को खुलेआम गोली मारकर सनसनी फैला दी। इस दुस्साहसिक घटना के बाद सावरकर को गिरफ्तार करके भारत भेज दिया गया और उन्हें दोहरी उम्रकैद की सजा देकर काला पानी यानी अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर भेज दिया गया, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां से कोई वापस नहीं लौटता। इससे आगे की कहानी जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।

अपने किरदारों में डूब जाने के लिए चर्चित एक्टर रणदीप हुड्डा का इस फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ से काफी जुड़ाव रहा है। उन्होंने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के अलावा इसके डायरेक्शन व प्रॉडक्शन का काम भी संभाला है। साथ ही उन्होंने उत्कर्ष नैथानी के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है। बतौर डायरेक्टर रणदीप ने फिल्म पर काफी मेहनत की है। करीब तीन घंटे लंबी फिल्म शुरुआत में आपको इसके किरदारों के साथ जोड़ती है। वहीं फिल्म का इंटरवल एक बेहद रोचक मोड़ पर होता है। हालांकि इंटरवल के बाद जरूर कहानी थोड़ी बोझिल हो जाती है, लेकिन जल्द ही यह फिर से पटरी पर लौट आती है।

‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के स्टार कास्ट

पहले यह फिल्म बीते साल रिलीज होनी थी, लेकिन रणदीप ने फिल्म के कई हिस्सों को दोबारा शूट किया है और उनकी मेहनत का असर फिल्म में नजर आता है। खासकर काला पानी वाले सीन देखकर रणदीप का फिल्म सरबजीत वाला अवतार याद आ जाता है। बात कलाकारों की एक्टिंग की करें तो रणदीप ने अपने किरदार में जबर्दस्त मेहनत की है। इसी का नतीजा है कि वह पर्दे पर आपको सावरकर ही नजर आते हैं। वहीं अमित सियाल समेत दूसरे कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। हालांकि फिल्म में विनायक व गणेश के अलावा बाकी किरदारों में लिए गए कलाकार अपने रोल में उतने फिट नहीं बैठते। फिल्म की सिनेमटोग्रफी अच्छी है और इसके सेट भी खूबसूरती से डिजाइन किए गए हैं। बेशक 100 साल पुराने दौर को पर्दे पर उतारना आसान नहीं था। वहीं काला पानी के भयावह दृश्य दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर व किरदारों की ड्रेस डिजाइनिंग भी दमदार है। हालांकि फिल्म का संगीत उतना दमदार नहीं है। इसका कोई भी गीत दर्शकों में देशभक्ति का जोश नहीं जगा पाता।

निर्देशक: रणदीप हुड्डा

स्टार कास्ट: रणदीप हुड्डा, अंकिता लोखंडे, अमित सिआल, चेतन स्वरूप, राजेश खेरा, रसेल जिऑफरी बैंक्स, ब्रजेश झा

स्टार रेटिंग: 4

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