बजट सत्र: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण में कृषि कानूनों की सराहना

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ शुक्रवार को बजट सत्र की शुरुआत हो गई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं व उपलब्धियों का ब्यौरा दिया।

सीमा पर चीन के साथ हुए हिंसक झड़प के बारे में बताते हुए राष्ट्रपति ने देश के वीर जवानों की जांबाजी की सराहना की। उन्होंने पिछले साल गलवन घाटी में शहीद जवानों का भी जिक्र किया।

संयुक्त राष्ट्र में अस्थायी सदस्यता, ब्रिक्स में अध्यक्ष बनने से लेकर राम मंदिर निर्माण तक में देश की उल्लेखनीय प्रगति का भी राष्ट्रपति ने जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘ऐसे अनेक निर्णय हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में लिए गए हैं। मेरी सरकार ने दिखाया है कि नीयत साफ हो, इरादे बुलंद हों तो बदलाव लाया जा सकता है।

इन वर्षों में मेरी सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है।’  उन्होंने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

अपने अभिभाषण के अंत में राष्ट्रपति ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर आगे बढ़ें, सभी देशवासी मिलकर आगे बढ़ें। अपना कर्तव्य निभाएं और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें, आइए, भारत को आत्मनिर्भर बनाएं।’

तीनों कृषि कानूनों पर राष्ट्रपति ने कहा, ‘कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए मेरी सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है। बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं।’

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