वोट से पहले वर्चस्व की लड़ाई… फिर बाहुबलियों के कब्ज़े में मोकामा

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा में हुई हिंसा और जन सुराज कार्यकर्ता की हत्या ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को मोकामा कांड पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

चुनाव आयोग पर तेजस्वी ने उठाया सवाल
तेजस्वी ने सवाल किया कि “आख़िर 40 गाड़ियों का काफिला हथियारों के साथ कैसे घूम सकता है?” उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की विफलता और चुनाव आयोग की निष्क्रियता को दर्शाता है। तेजस्वी ने कहा, “जो लोग जंगलराज की बात करते हैं, वही आज अपराधियों को पनाह दे रहे हैं। अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। आयोग को स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

बाहुबलियों के साये में मोकामा की सियासत
मोकामा विधानसभा सीट लंबे समय से बाहुबलियों के प्रभाव में रही है। 1990 के दशक में सूरजभान सिंह का नाम अंडरवर्ल्ड और राजनीति दोनों में चर्चा में रहा। 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई और तत्कालीन मंत्री दिलीप सिंह को हराया था।

इस बार मोकामा सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। आरजेडी से सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी मैदान में हैं, जबकि जेडीयू ने बाहुबली अनंत सिंह पर भरोसा जताया है। वीणा देवी पूर्व में मुंगेर से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की सांसद रह चुकी हैं। दोनों नेता भूमिहार समुदाय से आते हैं, जिससे यह सीट जातीय समीकरणों के लिहाज से भी अहम बन जाती है।

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‘बाहुबली बनाम बाहुबली’ की परंपरा
मोकामा की चुनावी राजनीति में बाहुबली बनाम बाहुबली मुकाबले की परंपरा पुरानी रही है।

  • 2010 और 2005 में ललन सिंह ने अनंत सिंह के खिलाफ एलजेपी से चुनाव लड़ा था।
  • 2020 में अनंत सिंह आरजेडी से चुनाव मैदान में थे, जबकि जेडीयू से राजीव लोचन नारायण सिंह उतरे थे।
  • 2022 के उपचुनाव में बीजेपी ने नलिनी रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को प्रत्याशी बनाया था।

ललन सिंह को सूरजभान सिंह का करीबी माना जाता है और इस बार सूरजभान की पत्नी वीणा देवी को उनका खुला समर्थन भी मिला है।

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‘हॉट सीट’ बन गया मोकामा
पटना जिले की मोकामा विधानसभा सीट इस बार बिहार चुनाव की सबसे चर्चित सीट बन गई है। यहां दो बाहुबलियों के बीच वर्चस्व की जंग ने माहौल गरमा दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुकाबला बिहार की सियासत में बाहुबल बनाम लोकतंत्र की नई बहस को जन्म देगा।

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