यूपी विधानसभा बना अखाड़ा! पक्ष और विपक्ष में तीखी झड़प और हाथापाई…

UP Budget Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उस समय जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया, जब कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और समाजवादी पार्टी (SP) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि सदन में हाथापाई जैसी स्थिति बन गई और कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित करनी पड़ी।

बजट चर्चा के दौरान भड़का विवाद
मामला उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपने संबोधन में कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय ने अंग्रेजों और मुगलों के बाद 75 साल से इन ‘बेईमानों’ से लड़ाई लड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के समय में गरीब, मछुआरों और पिछड़े वर्गों की अनदेखी की गई थी। इस टिप्पणी पर सपा विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और मंत्री से बयान वापस लेने की मांग की।

वेल में पहुंचे सपा विधायक
मंत्री के बयान से नाराज सपा विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और हंगामा बढ़ता चला गया। इस दौरान कुछ विधायकों ने मंत्री के पास जाकर उनके भाषण के कागज छीन लिए। इससे स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई और सदन का माहौल गरमा गया।

हाथापाई की नौबत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री और विपक्षी विधायकों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी। हालांकि मारपीट की औपचारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और टकराव से सदन की गरिमा पर सवाल उठने लगे।

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सरकार की ओर से शिकाय
घटना के बाद संसदीय कार्य राज्यमंत्री सुरेश खन्ना ने इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से की। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के साथ-साथ मंत्री के साथ अभद्र व्यवहार किया है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

विपक्ष का पलटवार
वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि मंत्री ने उकसाने वाले बयान दिए, जिससे माहौल बिगड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन नहीं किया जा रहा है।

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कार्यवाही प्रभावित
लगातार हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में स्थिति सामान्य होने पर कार्यवाही दोबारा शुरू की गई, लेकिन पूरे दिन सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इस तरह के टकराव से आगामी राजनीतिक माहौल और गरम हो सकता है, खासकर जब प्रदेश में विपक्ष और सरकार के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव जारी है।

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