
तेल संकट की आहट दुनिया में हाहाकार… भारत को मिल रहे ऑफर पर ऑफर
Energy Security: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल बाजार पर टिकी हुई है। कई देशों को आशंका है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस बीच India के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत की ऊर्जा स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है और देश के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है।
भारत के पास 8 सप्ताह का तेल भंडार
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग आठ सप्ताह का रणनीतिक भंडार मौजूद है। इसका मतलब है कि अगर वैश्विक बाजार में अचानक सप्लाई बाधित भी होती है, तब भी भारत कुछ समय तक अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकता है।
सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दिन में दो बार समीक्षा बैठक की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश में ईंधन की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न आए।
कई देशों से मिल रहे सप्लाई ऑफर
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत को कई देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति के प्रस्ताव मिल रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारी अलग-अलग सप्लायर देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त तेल खरीदा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर फिलहाल कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की कोई बड़ी कमी नहीं है। इसलिए भारत के पास विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा खरीदने के कई विकल्प मौजूद हैं।
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ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार की खास नजर
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए तेल कंपनियों और ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर लगातार स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य-पूर्व, रूस, अमेरिका और अन्य देशों से तेल आयात करता है। यही वजह है कि किसी एक क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर भी देश की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं होती।
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वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। इसी कारण मौजूदा संकट के बीच भी देश की ऊर्जा आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।
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