
कॉर्पोरेट सेक्टर के सहयोग से बिहार के स्कूलों में आएगा बदलाव, एमओयू पर हस्ताक्षर
Bihar News: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शनिवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए कॉर्पोरेट सेक्टर और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का उपयोग करके राज्य के स्कूलों में कंप्यूटर लर्निंग, हेल्थ सेंटर और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना है।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षा समाज को बदलने का सबसे बड़ा साधन है और इसी कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 से ही शिक्षा विभाग को प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में पिछले दो दशकों में लाखों शिक्षकों की नियुक्ति हुई, नए स्कूल खोले गए और शिक्षा का बुनियादी ढांचा बेहतर किया गया।
CSR Fund से उज्जवल होगा बच्चों का भविष्य
शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब समय आ गया है कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी मदद ली जाए। सीएसआर फंड के जरिये स्कूलों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग समाज को बदलने में सबसे बड़ा सहायक होता है। शिक्षा पर बजट भी सबसे ज्यादा है। लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं, स्कूलों में भी बढ़ोतरी हुई। लेकिन हमारी सोच है कि विभाग के अलावा कॉर्पोरेट सेक्टर और एनजीओ की मदद से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, खासकर छात्राओं का। इसी उद्देश्य से यह एमओयू किया गया है।”
अब तक की शिक्षकीय नियुक्तियाँ
बिहार सरकार ने शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती की है। अब तक बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से ढाई लाख से ज्यादा शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों की नियुक्तियाँ की जा चुकी हैं। इसके अलावा टीईटी-4 भर्ती प्रक्रिया के तहत लगभग 3.45 लाख नियुक्तियाँ पूरी की गई हैं।
शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी आवश्यकता अनुसार नई भर्तियाँ जारी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि टीईटी-5 परीक्षा जल्द लाई जाएगी।
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महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान
शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि नीतीश सरकार ने युवाओं, विशेषकर युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया है। अब तक विभिन्न विभागों में बिहार की युवतियों को 10 लाख से अधिक नौकरियाँ मिल चुकी हैं।
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शिक्षा सुधार का नया मॉडल
सरकार का मानना है कि कॉर्पोरेट और एनजीओ के सहयोग से:
- कंप्यूटर आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
- स्कूलों में हेल्थ सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
- छात्रों को परामर्श और करियर गाइडेंस भी मिल सकेगा।
- डिजिटल संसाधनों से ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी आधुनिक शिक्षा तक पहुँच पाएंगे।
यह कदम बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देगा और छात्रों को आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर करेगा।
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