
H-1B वीजा पर Trump का बड़ा फैसला, आवेदन पर लगेगा 1 लाख डॉलर शुल्क…
H-1B Visa: अमेरिका में काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम में व्यापक बदलाव करने का ऐलान किया है। नए आदेश के तहत अब प्रत्येक आवेदन पर कंपनियों को 1,00,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) का शुल्क देना होगा।
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों को रोजगार के अधिक अवसर देने और विदेशी कामगारों द्वारा “सस्ते में नौकरियों पर कब्जा” करने की प्रथा को रोकने के लिए उठाया गया है।
ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारी नौकरियां हमारे नागरिकों को मिलें। हमें अच्छे कामगार चाहिए और यह कदम उसी दिशा में है।”
गोल्ड कार्ड प्रोग्राम
इस आदेश के तहत ट्रंप ने नया “गोल्ड कार्ड प्रोग्राम” भी शुरू किया है। इसमें कोई व्यक्ति 10 लाख डॉलर देकर वीजा हासिल कर सकता है, जबकि कंपनियों के लिए यह शुल्क 20 लाख डॉलर होगा।
भारतीय पेशेवरों पर असर
एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलता रहा है। प्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में जारी 85 हजार नए H-1B वीजा में लगभग 73 प्रतिशत भारतीयों को मिले, जबकि चीन के लोगों को केवल 12 प्रतिशत।
इस नए नियम से:
- अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक पेशेवरों की नौकरी और वीजा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
- आईटी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा और जटिल हो जाएगा।
- कंपनियां अब स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने या दूरस्थ (remote) विकल्प अपनाने की दिशा में अधिक झुक सकती हैं।
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कंपनियों और उद्योग पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों पर गंभीर असर डालेगा। कंपनियों को अब विदेशी कर्मचारियों को रखने में अधिक लागत और प्रशासनिक बोझ का सामना करना पड़ेगा। इससे अनुसंधान, सॉफ्टवेयर विकास और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी भी महसूस हो सकती है।
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भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा असर
H-1B वीजा में यह बदलाव अमेरिकी नीति में एक बड़ा मोड़ है। यह कदम अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देने और विदेशी कामगारों पर निर्भरता कम करने की मंशा को दर्शाता है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए चुनौतियाँ बढ़ जाएंगी। भविष्य में यह देखा जाएगा कि भारतीय आईटी पेशेवर और कंपनियाँ किस तरह इस नए माहौल में अपनी रणनीति बदलते हैं।
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