ट्रंप का न्योता, क्या गाजा शांति बोर्ड में शामिल होगा भारत? विदेश मंत्रालय ने साफ किया रुख

Board of Peace: गाजा में जारी संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण और शांति बहाली की दिशा में अमेरिका ने एक नई पहल की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) नामक एक बहुपक्षीय तंत्र के गठन का ऐलान किया है, जिसकी पहली बैठक 19 फरवरी को प्रस्तावित है। इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत सहित कई प्रमुख देशों को निमंत्रण भेजा गया है। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस पहल का हिस्सा बनेगा? इस पर विदेश मंत्रालय ने अपना रुख स्पष्ट किया है।

क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्देश्य गाजा में युद्ध से प्रभावित बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता के समन्वय, सुरक्षा ढांचे की बहाली और दीर्घकालिक शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

इस बोर्ड में उन देशों को शामिल करने की योजना है जिनकी पश्चिम एशिया में कूटनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है और जो आर्थिक या तकनीकी सहयोग दे सकते हैं। अमेरिका का मानना है कि बहुपक्षीय भागीदारी से गाजा में पुनर्निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है।

भारत को क्यों भेजा गया न्योता?
भारत को निमंत्रण भेजे जाने के पीछे कई कूटनीतिक कारण माने जा रहे हैं—

  • पश्चिम एशिया में भारत के मजबूत और संतुलित संबंध
  • इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संवाद

मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं में भारत का अनुभव

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका
भारत पहले भी गाजा और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्कूल, आईटी केंद्र और स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण में सहयोग दे चुका है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारत पुनर्निर्माण प्रयासों में भागीदार बने।

विदेश मंत्रालय का क्या कहना है?
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के प्रस्ताव की जानकारी है और वह इसे अपने राष्ट्रीय हितों, क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक शांति प्रक्रिया के संदर्भ में देख रहा है।

मंत्रालय ने दोहराया कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का समर्थक है तथा मानवीय सहायता के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। हालांकि, किसी भी बहुपक्षीय तंत्र में औपचारिक रूप से शामिल होने का निर्णय सभी कूटनीतिक और रणनीतिक पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।

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भारत की पारंपरिक नीति
भारत लंबे समय से ‘दो-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) का समर्थन करता रहा है, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन दोनों की वैध आकांक्षाओं को मान्यता दी जाती है।

भारत ने हालिया संघर्ष के दौरान भी संतुलित रुख अपनाया—एक ओर आतंकवादी हमलों की निंदा की, तो दूसरी ओर नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया।

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कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।

  • यदि भारत बोर्ड में शामिल होता है, तो उसे क्षेत्रीय राजनीति और संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों से भी जुड़ना पड़ सकता है।
  • यदि भारत दूरी बनाए रखता है, तो अमेरिका के साथ सहयोग के एक अवसर को सीमित कर सकता है।

इसलिए संभावना है कि भारत पहले बोर्ड की संरचना, अधिकार-क्षेत्र और भूमिका स्पष्ट होने का इंतजार करे।

19 फरवरी को प्रस्तावित पहली बैठक से पहले यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होगा, पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएगा या फिलहाल औपचारिक दूरी बनाए रखेगा। विदेश मंत्रालय के संकेतों से साफ है कि भारत जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता देगा।

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