UP ATS की मदरसों पर सख़्ती… 8 जिलों से छात्रों-मौलवियों की पूरी जानकारी तलब

UP News: उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (यूपी एटीएस) ने मदरसों को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के आठ जिलों में संचालित मदरसों की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ स्थित एटीएस मुख्यालय ने प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजकर यह जानकारी जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मांगी गई जानकारी
एटीएस ने हर मदरसे से जुड़े तीन स्तरों की डिटेल तलब की है:

  • छात्र
  • मौलवी/शिक्षक
  • प्रबंधक/प्रबंधन से जुड़े लोग

इन सभी का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, पूरा पता, मोबाइल नंबर और अन्य पहचान संबंधी जानकारी भेजने को कहा गया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि यह सभी रिकॉर्ड अत्यधिक प्राथमिकता के आधार पर जुटाए जाएं।

प्रयागराज जिले को विशेष प्राथमिकता
एटीएस की प्रयागराज यूनिट को सबसे पहले प्रयागराज के सभी मदरसों की पूरी सूची और विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। बाकी सात जिलों की रिपोर्ट भी जल्द मुख्यालय भेजने की समयसीमा तय की गई है।

संदिग्ध गतिविधियों के इनपुट के बाद कार्रवाई
एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हाल ही में मिले कुछ खुफिया इनपुट में कुछ मदरसों में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई गई थी। इसे देखते हुए यह व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि—
“ज्यादातर मदरसे अच्छा काम कर रहे हैं। यह केवल एक सत्यापन प्रक्रिया है। सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

अभी कोई छापा या सीधी कार्रवाई नहीं
एटीएस ने साफ कहा है कि फिलहाल किसी मदरसे पर छापा नहीं मारा गया है, न ही कोई कानूनी कार्रवाई की गई है।
यह केवल जानकारी इकट्ठा करने और दस्तावेज़ वेरिफिकेशन का चरण है।
आगे जरूरत पड़े तो अधिकारी मौके पर जाकर जांच कर सकते हैं।

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जिला प्रशासन की तैयारी
प्रयागराज के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि सभी मदरसों को नोटिस भेज दिया गया है और कुछ दिनों में पूरी सूची एटीएस के हवाले कर दी जाएगी। अन्य जिलों में भी यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है।

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सरकार का पक्ष
राज्य सरकार के गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई एक नियमित सुरक्षा जांच का हिस्सा है।
सूत्रों ने कहा कि इससे किसी को घबराने की जरूरत नहीं है, और यह केवल रोकथाम एवं सत्यापन की प्रक्रिया है, न कि किसी विशेष समुदाय पर कार्रवाई।

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