यूपी पंचायत चुनाव 2026: आरक्षण के पेच में फंसे चुनाव, कब होगा मतदान?

UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही थी कि अप्रैल 2026 में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से चुनाव की समय सीमा पर संशय बन गया है।

क्या है अड़चन?
पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इसके तहत:

  • पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए समर्पित आयोग का गठन
  • आयोग द्वारा स्थानीय निकाय स्तर पर वास्तविक आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट
  • कुल आरक्षण 50% की सीमा से अधिक न हो

फिलहाल प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने हेतु समर्पित आयोग की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा रही। यही वजह है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने में देरी हो सकती है।

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कब हो सकते हैं चुनाव?
अगर राज्य सरकार समय रहते आयोग गठित कर रिपोर्ट तैयार करवा लेती है, तो चुनाव मई से पहले—अप्रैल के अंत तक—कराए जा सकते हैं।
लेकिन यदि आरक्षण निर्धारण में देरी होती है, तो चुनाव कुछ महीनों के लिए टल सकते हैं और तब तक प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना भी रहती है।

क्या होगा कार्यकाल खत्म होने के बाद?
मई 2026 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों का गठन न होने की स्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अधिकारियों को कार्यभार सौंपा जा सकता है, जैसा पहले भी कुछ राज्यों में हुआ है।

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आगे क्या?
राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों पर सबकी नजर है। जैसे ही आरक्षण का खाका स्पष्ट होगा, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अप्रैल 2026 में पंचायत चुनाव होंगे, या आरक्षण के पेच में कुछ महीनों के लिए टल जाएंगे?

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