हिमाचल विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, भाजपा-कांग्रेस के विरोध के बीच कार्यवाही बाधित

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के तीसरे दिन शुक्रवार को राज्य के सियासी गलियारों में हंगामे की स्थिति देखने को मिली। विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने अलग-अलग मुद्दों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दिन का सत्र प्रश्नकाल के साथ शुरू हुआ, लेकिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव बढ़ता गया।

भाजपा का प्रदर्शन
भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सदन के बाहर हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। पूर्व कर्मचारियों के ग्रेच्युटी शीघ्र जारी करने, समय पर पेंशन का भुगतान और चिकित्सा बिलों के भुगतान को लेकर नारेबाजी की गई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा दल के कई विधायक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे।

विपक्षी आरोप
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राजस्व मंत्री ने आरएसएस के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यह निदंनीय है और मंत्री को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाया कि वे अपने मंत्री को ऐसे विवादित बयान देने से क्यों नहीं रोक रहे हैं।

सदन में हंगामा
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। कई विधायक वेल में आ गए और जोरदार प्रदर्शन किया। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि दो दिनों से प्रश्नकाल बाधित हो रहा था, लेकिन विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही प्रभावित हुई।

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सदन के बाहर का दृश्य
सदन के बाहर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया। कांग्रेस ने सुक्खू सरकार को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए नारेबाजी की, जबकि भाजपा ने पूर्व कर्मचारियों के अधिकारों और लाभों के लिए प्रदर्शन किया।

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राजनीतिक तनाव का असर
इस हंगामे ने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विवादित टिप्पणियों और प्रदर्शन ने सदन की कार्यवाही को बाधित किया और यह स्पष्ट कर दिया कि आगामी सत्र में भी राजनीतिक लड़ाई तेज हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह संदेश गया कि हिमाचल विधानसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद गंभीर हैं और कर्मचारियों के मुद्दे तथा विवादित बयान राजनीतिक बहस का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

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