
बांग्लादेश में सामूहिक बलात्कार के विरोध में हिंसा; 3 आदिवासी की मौत, सैकड़ों घायल
Bangladesh News: बांग्लादेश के खगराछारी जिले में एक स्कूली छात्रा से सामूहिक बलात्कार के विरोध में हुए प्रदर्शन हिंसक रूप धारण कर गए। इस हिंसा में तीन आदिवासी मारे गए, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। घटना के बाद कई मानवाधिकार, सांस्कृतिक और राजनीतिक समूहों ने इस हिंसा की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
स्थानीय मीडिया के अनुसार यह घटना रविवार दोपहर को खगराछारी के गुइमारा उपजिला के रामेसु बाजार में हुई। ‘जुम्मा छात्र जनता’ के बैनर तले विरोध प्रदर्शनकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच झड़प हो गई।
खगराछारी जिले के सिविल सर्जन मोहम्मद सबरे ने पुष्टि की कि हिंसा में तीन आदिवासी मृत पाए गए। इस दौरान 15 घर और 60 दुकानें आग के हवाले कर दी गईं, जिससे स्थानीय जनता और मानवाधिकार संगठनों में व्यापक आक्रोश फैल गया।
मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) ने सवाल उठाया कि क्या न्याय की जायज मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई निहित स्वार्थों की साजिश या प्रशासन की उदासीनता का परिणाम है। टीआईबी ने यह भी कहा कि मूलनिवासी महिलाओं पर बलात्कार को सामान्य बनाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने सरकार से मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, पीड़ितों को उचित राहत दी जाए और प्रभावित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उदिची शिल्पीगोष्ठी संगठन ने इसे लोकतंत्र और मानवता के लिए कलंक करार दिया।
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महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की मांग
‘नारीबाड़ी’ के तहत 84 महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने बलात्कार की घटना के दोषियों पर तत्काल मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले वर्ष भी खगराछारी में सात आदिवासी महिलाओं से बलात्कार हुआ था, और हर बार न्याय की मांग करने वालों को हमलों, कानूनी देरी और राज्य की उदासीनता का सामना करना पड़ा।
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सांप्रदायिक हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति
पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के बाद से देश में विरोध प्रदर्शनों और अराजकता की स्थिति बनी हुई है। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध की बढ़ती घटनाओं ने देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को उजागर किया है।
इस घटना ने बांग्लादेश में मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा और महिला सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार समूहों ने सरकार से तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों को कठोर सजा देने की अपील की है।
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