कर्नाटक जेल में आतंकियों को VIP ट्रीटमेंट… कांग्रेस सरकार पर BJP का हमला

Biryani for terrorists: कर्नाटक की बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में आतंकवादियों और सीरियल रेपिस्ट को कथित रूप से VIP सुविधाएं दिए जाने के मामले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ कुख्यात कैदियों को जेल के भीतर मोबाइल फोन, बिरयानी और अन्य विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। बताया जा रहा है कि यह सब जेल कर्मियों की मिलीभगत से संभव हुआ।

भाजपा ने कांग्रेस सरकार को घेरा
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कर्नाटक सरकार आतंकवादियों के प्रति नरम रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने आरोप लगाया,

“एक ओर जब केंद्र सरकार आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं कर्नाटक की जेल में आतंकियों को मोबाइल, पार्टी और बिरयानी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। यह कांग्रेस की ‘बिरयानी फॉर आतंकवादी’ नीति है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आतंकियों के प्रति नरम रवैया नया नहीं है।

“राहुल गांधी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के साथ खड़े होते हैं, कांग्रेस के नेता याकूब मेनन के पक्ष में पैरवी करते हैं और ओसामा बिन लादेन को ‘ओसामा जी’ कहते हैं। यही कांग्रेस की सोच है।”

पूनावाला ने कहा कि यह मुद्दा केवल जेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की मानसिकता और सुरक्षा नीति की कमजोरी को दर्शाता है।

कुमारस्वामी ने कहा — “जेल में ही नहीं, विधानसभा में भी आतंकवादी”
केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,

“यह शर्मनाक है कि जेल कर्मचारी आतंकियों और रेपिस्ट को शाही सुविधाएं दे रहे हैं। यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है।”

उन्होंने आगे कहा,

“आतंकवादी सिर्फ जेल में नहीं, बल्कि विधान सौध (कर्नाटक विधानसभा) में भी हैं। वहां बैठे कुछ लोग जनता की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।”

कुमारस्वामी ने यह भी याद दिलाया कि पहले भी इसी जेल में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

“पहले दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के बीच इसी मुद्दे पर विवाद हुआ था। अदालतों ने तब चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब वही घटनाएं दोहराई जा रही हैं।”

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जेल प्रशासन पर उठे सवाल
इस मामले ने जेल प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आतंकवादियों या गंभीर अपराधियों को जेल में मोबाइल और अन्य साधन मिल रहे हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

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कांग्रेस सरकार पर बढ़ा दबाव
इस विवाद के बाद अब सभी की निगाहें कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और गृह विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो भाजपा और जेडीएस राज्यव्यापी विरोध शुरू करेंगे।

संक्षेप में, परप्पना अग्रहारा जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा और जेडीएस ने इसे कांग्रेस की “ढिलाई और तुष्टिकरण की नीति” बताया है, जबकि जनता अब राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

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