
Odisha के कालाहांडी में मातम, सेप्टिक टैंक बना मौत का कुंआ… गई कई जानें
पुलिस और प्रशासन के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब मजदूर एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के अंदर काम कर रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस भर गई थी या ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई थी, जिसकी वजह से मजदूर बेहोश होकर गिरने लगे।
एक-दूसरे को बचाने में गई कई जानें
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब टैंक के अंदर काम कर रहे एक मजदूर की हालत बिगड़ी तो उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति अंदर गया। इसके बाद एक-एक कर कई लोग अंदर उतरते गए, लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आने से वे भी बेहोश हो गए।
कुछ ही देर में घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। गांव वालों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। बचाव दल मौके पर पहुंचा और काफी मशक्कत के बाद सभी लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक छह लोगों की मौत हो चुकी थी।
अस्पताल में भर्ती घायल की हालत गंभीर
हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और लगातार निगरानी में इलाज किया जा रहा है।
पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने जताया दुख
Mohan Charan Majhi ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कालाहांडी जिले के मदनपुर-रामपुर में निर्माण स्थल पर हुआ हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मजदूरों के पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं थे। विशेषज्ञों का कहना है कि सेप्टिक टैंक जैसे बंद स्थानों में काम करते समय गैस जांच, ऑक्सीजन सपोर्ट और सुरक्षा किट बेहद जरूरी होते हैं।
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सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े हादसे लगातार सामने आते रहे हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही के कारण मजदूरों की जान जोखिम में पड़ती है।
पूरे इलाके में शोक का माहौल
घटना के बाद करियाखुंटा गांव और आसपास के इलाकों में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोग इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बता रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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