सुप्रीम कोर्ट ने बिहार मतदाता सूची SIR याचिकाओं की सुनवाई 4 नवंबर तक की स्थगित

Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SIR) से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई 4 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान अदालत में चुनाव आयोग और एडीआर (Association for Democratic Reforms) के वकील प्रशांत भूषण के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

चुनाव आयोग और प्रशांत भूषण के बीच बहस
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से वकील राकेश द्विवेदी ने आरोप लगाया कि प्रशांत भूषण अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और दस्तावेजों में हेराफेरी और गलत बयानों का सहारा ले रहे हैं।

इसका जवाब देते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्होंने जो नाम अदालत में प्रस्तुत किए थे, वे ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटाने के बाद भी कई नए नाम गुपचुप तरीके से डिलीट किए, लेकिन अब तक इन नामों का पूरा ब्योरा और कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

भूषण ने अदालत से मांग की कि आयोग को हर हटाए गए नाम की विस्तृत जानकारी और कारण के साथ सूची सार्वजनिक करनी चाहिए।

चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर और दूसरे चरण के लिए 20 अक्टूबर है। इसलिए मतदाता सूची इन तारीखों तक फ्रीज रहेगी।

द्विवेदी ने सवाल उठाया कि जब आयोग खुद यह प्रक्रिया कर रहा है तो याचिकाकर्ता न्यायालय से ऐसा निर्देश क्यों मांग रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, और नाम जोड़ने व हटाने के बाद सूची प्रकाशित करना संवैधानिक बाध्यता है।

अदालत ने कहा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची सभी राजनीतिक दलों और मतदान एजेंटों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

आयोग से निर्देशित किया गया कि उसका जवाबी हलफनामा याचिकाकर्ता को सौंपा जाए, और प्रशांत भूषण को 10 दिनों के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने का आदेश दिया गया।

अन्य याचिकाकर्ताओं का पक्ष
अन्य याचिकाकर्ताओं के वकील गोपाल शंकर नारायणन और वृंदा ग्रोवर ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग के पास SIR जैसी प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को लिखित नोट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि अदालत ने साफ कर दिया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सुनवाई में आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने की अनुमति को चुनौती दी गई है, जो आधार एक्ट के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाए और हर हटाए गए नाम का विवरण उपलब्ध कराए। सुनवाई अब 4 नवंबर तक स्थगित कर दी गई है।

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