प्रदेश की सभी गौशालाओं की होगी मंडलवार समीक्षा

पराग उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग पर दें:धर्मपाल सिंह 

 

गोशालाओं का सुव्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्म पाल सिंह ने  गो संरक्षण एवं हरा चारा, संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान तथा दुग्ध समितियों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोसंरक्षण, पशु स्वास्थ्य एवं दुग्ध विकास से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

पशुधन मंत्री ने निर्देश दिए कि 30 तक प्रदेश की सभी गौशालाओं की मंडलवार समीक्षा पूरी कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का प्रबंधन व्यवस्थित एवं प्रभावी तरीके से किया जाए तथा गोवंश के लिए चारा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं लगातार सुनिश्चित रहें। उन्होंने किसानों के साथ हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे गौशालाओं में हरे चारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा।

प्रत्येक गांव में गठित हो दुग्ध समिति

श्री धर्मपाल सिंह ने संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि 30 अगस्त तक टीकाकरण का कार्य कम से कम 70 प्रतिशत पूरा कर लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि टीकाकरण अभियान की नियमित निगरानी की जाए और लक्षित पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।

मंत्री ने बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुओं के लिए चारा, भूसा, औषधि, पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में पशुपालकों और गोवंश को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाकर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील जनपदों में विशेष सतर्कता बरतने तथा परिस्थितियों की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

श्री सिंह ने प्रदेश में गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा जुलाई 2026 में किए गए स्थलीय निरीक्षण में चिन्हित समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण में जलभराव एवं कीचड़, खड़ंजा एवं पंडना, हरा चारा एवं पशु आहार, शेड एवं बाउंड्रीवाल तथा अभिलेखीकरण एवं टैगिंग से संबंधित समस्याएं सामने आईं। इन समस्याओं से प्रभावित जनपदों में गोंडा, बहराइच, मुरादाबाद, अमरोहा, वाराणसी, जालौन, संत कबीर नगर, उन्नाव, अयोध्या, गोरखपुर, रामपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जौनपुर, बलिया, ललितपुर, देवरिया, कानपुर देहात, मथुरा, महोबा, बुलंदशहर, बागपत, मेरठ, चंदौली, बाराबंकी, आजमगढ़, अमेठी, बरेली, सहारनपुर एवं मऊ शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों को चिन्हित कमियों का प्राथमिकता से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा करते हुए पशुधन मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में अधिक से अधिक दुग्ध समितियों का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में एक दुग्ध समिति गठित करने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध समितियों से जोड़ा जा सके और उन्हें उनके दुग्ध उत्पादन का बेहतर लाभ मिल सके। पराग के उत्पादों की मार्केटिंग पर विशेष फोकस किया जाए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने संबंधित अधिकारियों को मंत्री जी द्वारा दिए गए निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से3 दिए गए निर्देशों की मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और उनका अक्षरशः पालन किया जाए।उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुचिकित्साधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, हरे चारे एवं भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए,एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान तथा दुग्ध समितियों के गठन सहित सभी प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए।

बैठक में विशेष सचिव दुग्ध विकास श्री देवेन्द्र पाण्डेय, विशेष सचिव राम सहाय यादव, दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के., प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ प्रकाश बिंदु, पशुपालन विभाग के निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ राजेंद्र प्रसाद, निदेशक(रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र)डॉ. संगीता तिवारी, पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पी.के. सिंह सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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