Sharad Purnima की खीर में आ जाते है औषधीय गुण, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं

Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, केवल एक त्यौहार नहीं है। इसका धार्मिक, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्व है। “कोजागरी” का अर्थ है – “कौन जाग रहा है?”, क्योंकि इस रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों के जागरण की परीक्षा लेती हैं।

Sharad Purnima 2025: हर साल अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। यह एक खास दिन होता है और इसे कोजागिरी पूर्णिमा, अश्विन पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। केवल एक त्यौहार नहीं है. इसका धार्मिक, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्व है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में धन की कमी दूर होती है। लेकिन सबसे खास है, शरद पूर्णिमा उपाय, जिसमें खीर में औषधीय गुण पैदा हो जाते हैं।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी का प्राकट्योत्‍सव

आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस रात का इंतजार करते हैं और जीवनदायिनी और रोगनाशक जड़ी-बूटियों को चांदनी में रखकर उनकी शक्ति बढ़ाते हैं। इसके अलावा शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्‍मी के प्राकट्योत्‍सव के रूप में मनाया जाता है। यह भी एक वजह है कि शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी को प्रिय खीर का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाने से मां लक्ष्‍मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल 6 अक्टूबर को शारदीय पूर्णिमा है।

धार्मिक मान्यताएं

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है. इस साल 6 अक्टूबर को शारदीय पूर्णिमा है. इसे अमावस्या या अन्य पर्वों से अलग, विशेष रूप से चांद की पूजा और भक्ति के लिए जाना जाता है. इस दिन खीर बनाकर देवी-देवताओं को अर्पित करना और चंद्रमा की कृपा प्राप्त करना एक प्राचीन परंपरा है.

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और देवी-देवताओं को अर्पित करने का उल्लेख है. खीर को शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. इसे अर्पित करने से संपूर्ण परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है. खीर में दूध और चावल के मिश्रण को अन्न और पोषण का प्रतीक माना गया है.

अमृत जैसी खीर की वैज्ञानिक मान्यता

sharad purnima kheer ka mahatva: वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस समय अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्र किरणों के माध्यम से पृथ्वी पर पड़ती हैं। इससे इस समय पूर्णिमा की चांदनी में खुले आसमान के नीचे रखी गई खीर चंद्रमा के प्रभाव से औषधीय गुणों से युक्त हो जाती है। चंद्रमा की इन्हीं किरणों के कारण खीर अमृत के समान हो जाती है। इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होगा।

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