
नए साल से पहले डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल, दिल्ली-NCR में फूड और क्विक कॉमर्स सेवाएं ठप
Delivery Partner Strike: नए साल के जश्न से ठीक पहले फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। 31 दिसंबर को दिल्ली-NCR समेत देश के कई हिस्सों में डिलीवरी पार्टनर्स हड़ताल पर चले गए हैं। इसका असर Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Amazon और Flipkart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में ऑर्डर देर से पहुंच रहे हैं तो कई जगह सीधे कैंसिल किए जा रहे हैं।
यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में लाखों गिग वर्कर्स शामिल हैं, जिससे न्यू ईयर ईव के पीक ऑवर्स में सेवाएं और ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं।
क्यों हड़ताल पर हैं डिलीवरी पार्टनर्स?
डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि वे लंबे समय से कम वेतन, बढ़ते काम के घंटे और खराब कार्य परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। गुरुग्राम के एक डिलीवरी एजेंट ने बताया कि उन्हें रोज़ 14–15 घंटे सड़क पर काम करना पड़ता है, लेकिन दिन के अंत में मुश्किल से 700–800 रुपये ही बचते हैं।
वर्कर्स का आरोप है कि ऑर्डर कैंसिल होने पर पेनाल्टी उन्हीं पर डाल दी जाती है, जबकि कंपनियां इंश्योरेंस या दुर्घटना कवर नहीं देतीं। कई मामलों में शिकायत करने पर आईडी ब्लॉक कर दी जाती है।
10-मिनट डिलीवरी मॉडल बना सबसे बड़ा मुद्दा
डिलीवरी पार्टनर्स के मुताबिक 10-मिनट डिलीवरी का दबाव उनकी जान के लिए खतरा बन गया है। समय पर डिलीवरी के लिए ट्रैफिक नियम तोड़ने पड़ते हैं, जिससे हादसों का जोखिम बढ़ गया है। वर्कर्स का कहना है कि पहले कम दूरी में बेहतर भुगतान मिलता था, अब दूरी बढ़ा दी गई है लेकिन रेट घटा दिए गए हैं।
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यूनियनों की मांगें और राजनीतिक समर्थन
हड़ताल का आह्वान इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने किया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- पुरानी पे स्ट्रक्चर बहाल की जाए
- 10-मिनट डिलीवरी मॉडल बंद हो
- बिना कारण आईडी ब्लॉकिंग पर रोक
- इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी
- दुर्घटना में मुआवजा
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा ने भी गिग वर्कर्स का समर्थन करते हुए 10-मिनट डिलीवरी मॉडल पर बैन की मांग दोहराई है।
कंपनियों की रणनीति और मौजूदा हालात
क्रिसमस के दौरान हुई पिछली हड़ताल में गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाकों में इसका असर देखा गया था। न्यू ईयर ईव पर कंपनियां स्थिति संभालने के लिए पीक ऑवर्स में 120–150 रुपये प्रति ऑर्डर तक अतिरिक्त इंसेंटिव देने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि कई इलाकों में डिलीवरी पार्टनर्स ने पूरी तरह काम बंद कर रखा है।
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कंपनियों की तैयारी और ग्राहकों पर असर
हड़ताल के चलते कंपनियां पीक ऑवर्स में अतिरिक्त इंसेंटिव देकर डिलीवरी पार्टनर्स को काम पर लौटने के लिए मनाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, न्यू ईयर पर ऑर्डर्स आमतौर पर 3–4 गुना बढ़ जाते हैं, ऐसे में रेस्टोरेंट्स को बिजनेस लॉस और फूड वेस्टेज का डर सता रहा है। कई रेस्टोरेंट्स ने ग्राहकों को खुद डिलीवरी का विकल्प देना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ ग्राहकों ने पहले से बल्क ऑर्डर करके तैयारी कर ली है।
फिलहाल बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो नए साल की रात दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में फूड और क्विक कॉमर्स सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित रह सकती हैं।
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