PM Modi ने मनाया पोंगल… तमिल संस्कृति को बताया दुनिया की प्राचीनतम जीवित सभ्यता
Pongal festival: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार सुबह केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पारंपरिक पूजा-अर्चना की और गाय को चारा भी खिलाया। समारोह पूरी तरह तमिल परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किया गया था।
पोंगल कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल संस्कृति की ऐतिहासिक और वैश्विक महत्ता पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है, जो सदियों को जोड़ते हुए आज भी जीवंत रूप में मौजूद है। पीएम ने कहा कि आज पोंगल केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक त्योहार बन चुका है।
‘तमिल संस्कृति इतिहास से सीखकर भविष्य का मार्ग दिखाती है’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया भर में बसे तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग पोंगल को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा,
“मुझे गर्व है कि मैं भी उन लोगों में शामिल हूं जो पोंगल और तमिल परंपराओं को दिल से अपनाते हैं।”
प्रकृति, परिवार और समाज के संतुलन का संदेश
पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। यह हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। यह त्योहार धरती, सूर्य, पशुओं और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत का सम्मान करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि:
- हमारी थाली भी भरी रहे
- हमारी जेब भी भरी रहे
- और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे
साझा किए तमिल विरासत से जुड़े अनुभव
प्रधानमंत्री ने पिछले एक वर्ष में तमिल संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि:
- गंगईकोंड चोलपुरम के लगभग 1000 वर्ष पुराने मंदिर में दर्शन का सौभाग्य मिला
- काशी तमिल संगमम में तमिल संस्कृति की जीवंत परंपराओं को करीब से देखा
- रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन के दौरान तमिल विरासत की भव्यता का अनुभव हुआ
यह भी पढ़ें…
Modi-Merz Meet: PM मोदी ने जर्मनी के साथ जोड़ी रिश्तों की नई डोर, चांसलर मर्ज साथ उड़ाई पतंग
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल हमें सिखाता है कि कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बने। मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है।
उन्होंने मिशन LiFE, एक पेड़ मां के नाम और अमृत सरोवर जैसे अभियानों को इसी सोच का विस्तार बताया।
यह भी पढ़ें…
ISRO का PSLV C62 मिशन फेल…तीसरे स्टेज में रास्ते से भटका सैटेलाइट
पोंगल क्या है?
पोंगल तमिल समुदाय का प्रमुख फसल पर्व है, जो हर साल 14 से 17 जनवरी के बीच मनाया जाता है। यह सूर्य देव, प्रकृति, पशुओं और किसानों के प्रति आभार प्रकट करने का त्योहार है। इसके चार प्रमुख दिन होते हैं—
- भोगी पोंगल
- सूर्य पोंगल
- मट्टू पोंगल
- कानूम पोंगल
इस दौरान नए चावल से सक्कराई पोंगल (मीठा) और वें पोंगल (नमकीन) जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। मिट्टी के बर्तन में खुले स्थान पर पकाए गए दूध-चावल का उफनना समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है।
यह भी पढ़ें…





