
Noida: गहरे पानी में 2 घंटे तक जिंदगी के लिए लड़ा युवराज, 80 मिलकर भी नहीं बचा पाए
Noida Techie Death Case: ग्रेटर नोएडा में एक हादसे के बाद डूबकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कहानी बेहद दर्दनाक है। इस हादसे ने नोएडा प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
Noida Techie Death Case: नोएडा के सेक्टर 150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार समेत गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई. डूबने से पहले करीब 90 मिनट तक वह कार की छत पर खड़े होकर जल्दी बचाने की गुहार लगाते रहे. लेकिन मौके पर मौजूद बचाव टीम ने देर से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। जिससे उसकी मौत हो गई. युवराज ने खुद को बचाने की भरसक कोशिश की। बचाव टीम भी मौके पर पहुंची लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पानी में उतरने की हिम्मत नहीं कर पाए बचावकर्मी
इंजीनियर युवराज की मौत ने अनेक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। युवराज के दोस्तों और मौके पर जुटे अन्य लोगों का कहना है कि इस घटना में दमकल, एसडीआरएफ और पुलिस की मानवीय संवेदनहीनता सामने आई है। किसी ने भी पानी में उतरने कि हिम्मत नहीं जुटाई। दमकल और एसडीआरएफ के पास आपदा से निपटने के संसाधन कम पड़ गए।
युवराज के पिता ने नोएडा प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि 3 विभाग के लगभग 80 लोगों की टीम बेटे को नहीं बचा पाई. फायर डिपार्टमेंट, नोएडा पुलिस और SDRF की टीम मौके पर मौजूद थी. लेकिन इन विभाग के लोग रेस्क्यू के लिए पानी में इसलिए नहीं उतरे क्योंकि उनका कहना था कि पानी बहुत ठंडा है और पानी में सरिया भी हो सकता है.
20 फीट से ज्यादा था गड्ढा
युवराज मेहता टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के रहने वाले थे, जिनकी कार शनिवार रात सेक्टर 150 में एक अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के बेसमेंट के लिए खोदे गए 20 फीट से ज़्यादा गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी. पुलिस ने बताया कि मेहता जो गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते थे. घने कोहरे के बीच काम से घर लौट रहे थे. तभी यह हादसा हुआ.
चश्मदीद ने भी देर से रेस्क्यू का किया दावा
एक चश्मदीद, जो एक डिलीवरी एजेंट है. उसने भी दावा किया कि रेस्क्यू अभियान में भी देरी हुई. अगर रेस्क्यू तेज़ी से किया जाता तो मेहता बच सकते थे. वहीं पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है, जबकि बचाव अभियान में लापरवाही से इनकार किया है.
फिलहाल अब नोएडा अथॉरिटी ने मामले में एक जूनियर इंजीनियर को नौकरी से निकाल दिया है और इलाके में ट्रैफिक से जुड़े कामों के लिए ज़िम्मेदार दूसरे अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. साथ ही साइट डेवलपर लोटस के अलॉटमेंट और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी के बारे में संबंधित विभागों से डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है. इसके अलावा साइट पर सुरक्षा इंतज़ामों की समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया है.





