
Aravalli में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त… यह अपराध है, बख्शा नहीं जाएगा
Aravalli Hills Case: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में हो रहे अवैध खनन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सिर्फ कानून उल्लंघन नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है, जिसका सीधा असर देश के पर्यावरणीय भविष्य पर पड़ता है। शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सजा दी जाएगी।
अरावली की परिभाषा पर अहम टिप्पणी
अरावली पहाड़ियों की वैज्ञानिक परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल तकनीकी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरणीय अधिकारों से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने माना कि अब तक अरावली को लेकर जो परिभाषाएं और मापदंड अपनाए गए हैं, वे अधूरे और भ्रमित करने वाले हैं, जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिला।
हाई-पावर्ड कमेटी बनाए जाने का आदेश
अदालत ने अरावली की स्पष्ट, वैज्ञानिक और सर्वमान्य परिभाषा तय करने के लिए एक उच्च-स्तरीय (हाई-पावर्ड) समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति में पर्यावरण, वानिकी, भू-विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों, एमिकस क्यूरी और संबंधित संस्थाओं से चार सप्ताह के भीतर संभावित विशेषज्ञों के नाम और सुझाव देने को कहा है।
पुराने फैसले पर रोक बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने उस पुराने निर्णय पर लगी रोक को भी आगे बढ़ा दिया है, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की बात कही गई थी। पर्यावरण मंत्रालय की समिति की इस सिफारिश को अदालत पहले ही स्थगित कर चुकी है। कोर्ट का मानना है कि ऊंचाई के आधार पर अरावली की पहचान करना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है और इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।
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राजस्थान में अवैध खनन पर सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान राजस्थान के कई इलाकों में लगातार हो रहे अवैध खनन का मुद्दा उठाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में फटकार लगाई और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अरावली क्षेत्र पहले ही पर्यावरणीय दबाव झेल रहा है और अब वह किसी अतिरिक्त बोझ को सहन करने की स्थिति में नहीं है।
“भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों का सवाल”
अदालत ने टिप्पणी की कि अवैध खनन केवल आज की समस्या नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकारों पर सीधा हमला है। इसलिए इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पिछले साल दिसंबर में पारित अंतरिम आदेश अगले आदेश तक लागू रहेगा।
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गहराई से होगी जांच
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस पूरे मामले की हर पहलू से गहराई से जांच करेगी, ताकि अरावली पहाड़ियों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही हस्तक्षेपकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे एमिकस क्यूरी के माध्यम से अपनी रिपोर्ट और आपत्तियां अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि अरावली में अवैध खनन करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
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