UP News: यूपी में बढ़ी बिजली की डिमांड, इंडक्शन और EV ने बढ़ाया ‘पावर’ लोड

UP News: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी से पहले ही बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, जो अब 21,450 मेगावाट पहुंच गई है। इंडक्शन उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

UP News: उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग अचानक तेज़ी से बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह एलपीजी सिलेंडर की किल्लत, इंडक्शन चूल्हों का बढ़ता इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की चार्जिंग बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में बिजली की मांग करीब 3,000 मेगावॉट तक बढ़ चुकी है और यह जल्द ही 34,000 मेगावॉट के पार जा सकती है, जिससे बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

क्यों बढ़ रही है बिजली की खपत

  • LPG की कमी के कारण लोग गैस की जगह इंडक्शन स्टोव पर खाना बना रहे हैं
  • शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आधारित उपकरण बढ़े
  • इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से EV चार्जिंग लोड बढ़ा
  • गर्मी शुरू होने से AC-कूलर का उपयोग भी बढ़ने वाला है

सरकार की तैयारी

  • बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा खपत का सर्वे कराया जाएगा
  • ग्रामीण छोटे दुकानदारों के लिए विशेष टैरिफ योजना पर विचार
  • बिजली चोरी पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी
  • अतिरिक्त बिजली व्यवस्था के लिए वितरण सिस्टम की समीक्षा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मांग बढ़ने के साथ अवैध कनेक्शन और बिजली चोरी की आशंका भी बढ़ सकती है, इसलिए निगरानी सख्त की जाएगी। इन कारणों से बिजली विभाग को नए सिरे से लोड मैनेजमेंट की रणनीति बनानी पड़ रही है।

देशभर में बढ़ रहा इंडक्शन ट्रेंड

LPG की कमी के कारण केंद्र सरकार भी बड़े स्तर पर इंडक्शन स्टोव वितरण योजना शुरू कर रही है। ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम के तहत लाखों इंडक्शन कुकटॉप वितरित किए जाएंगे ताकि लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाएं। इसी तरह कई शहरों में होटल और घरों ने भी LPG की कमी के कारण इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाई, जिससे बिजली की मांग और बढ़ गई।

पहले भी दिख चुका है ट्रेंड

गर्मी से पहले ही यूपी में पिछले दिनों बिजली की खपत करीब 2,000 मेगावॉट बढ़ी थी, जिसमें इंडक्शन और बिजली आधारित कुकिंग को प्रमुख कारण बताया गया था। उत्तर प्रदेश में ऊर्जा खपत का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

  • गैस से बिजली की ओर शिफ्ट
  • EV चार्जिंग में तेजी
  • गर्मी का असर

इन तीनों कारणों से आने वाले महीनों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती है, जिससे सरकार को उत्पादन और वितरण दोनों बढ़ाने की जरूरत होगी।

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