सुशासन, संस्कृति और समृद्धि पर लखनऊ में मंथन, ‘त्रिवेणी’ बना विचारों का मंच…

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के दूसरे दिन सुशासन, संस्कृति, विकास और डिजिटल लोकतंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में देशभर से आए डिजिटल क्रिएटर्स, नीति विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और उत्तर प्रदेश में हो रहे बदलावों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने राज्य में पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास कार्यों, निवेश, कानून-व्यवस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और डिजिटल परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। कई प्रतिभागियों ने उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राज्य ने विकास और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

100 से अधिक विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कंटेंट क्रिएटर्स, उद्यमी, शिक्षाविद, नीति निर्माता, शोधकर्ता और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करना और डिजिटल माध्यमों के जरिए समाज, शासन और विकास से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा देना था। प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे और समसामयिक विषयों पर विमर्श किया।

सुशासन और विकास मॉडल पर केंद्रित रही चर्चा
दूसरे दिन के प्रमुख सत्रों में उत्तर प्रदेश के सुशासन मॉडल, प्रशासनिक सुधारों और आर्थिक विकास पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में आधारभूत ढांचे के विकास, निवेश आकर्षित करने, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो परियोजनाओं और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी योजनाओं ने विकास की नई संभावनाएं पैदा की हैं।

प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए प्रयासों और प्रशासनिक पारदर्शिता ने निवेशकों तथा आम नागरिकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संस्कृति और विरासत पर भी हुआ मंथन
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि काशी, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहरों में हुए विकास कार्यों ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किए गए।

डिजिटल लोकतंत्र की भूमिका पर चर्चा
‘त्रिवेणी’ संवाद का प्रमुख उद्देश्य डिजिटल लोकतंत्र की अवधारणा को मजबूत करना भी था। विभिन्न वक्ताओं ने बताया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जनमत निर्माण और शासन-प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल युग में सूचना का तेजी से प्रसार हो रहा है और ऐसे में जिम्मेदार संवाद, तथ्य आधारित चर्चा तथा सकारात्मक सहभागिता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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युवाओं और क्रिएटर्स की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल हुए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज विचारों के आदान-प्रदान और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

युवाओं ने तकनीक, नवाचार, स्टार्टअप और रोजगार जैसे विषयों पर भी अपने सुझाव दिए और डिजिटल इंडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की।

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विचारों का संगम बना ‘त्रिवेणी’
तीन दिवसीय इस आयोजन को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और विचारकों के संगम के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में शासन, विकास, संस्कृति, लोकतंत्र और तकनीक जैसे विविध विषयों पर गंभीर मंथन हुआ।

आयोजकों के अनुसार, ‘त्रिवेणी’ का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करना और विकास से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के आगामी सत्रों में भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

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