
जुलाई से बदलेगी सरकारी स्कूलों की पढ़ाई, छात्रों के लिए शुरू होगा ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू करने जा रही है। जुलाई से राज्य के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य उन छात्र-छात्राओं को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता प्रदान करना है, जो अपनी कक्षा के अनुरूप अपेक्षित सीखने के स्तर तक अभी नहीं पहुंच पाए हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई इस योजना को प्रदेश में शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा बुनियादी पढ़ाई, लेखन और गणित जैसी आवश्यक दक्षताओं में पीछे न रह जाए।
सीखने की कमी को दूर करने पर रहेगा फोकस
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई बार छात्र अगली कक्षाओं में तो पहुंच जाते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी शैक्षणिक समझ अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो पाती। इसका असर आगे की पढ़ाई पर पड़ता है और छात्र धीरे-धीरे पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं।
इसी चुनौती से निपटने के लिए ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत ऐसे छात्रों की पहचान की जाएगी जिन्हें पढ़ने, लिखने, समझने या गणितीय गणनाओं में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। फिर उनके लिए विशेष शिक्षण गतिविधियां और अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
सभी जिलों को जारी हुए निर्देश
इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्यों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों में कहा गया है कि अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक छात्र की वास्तविक सीखने की क्षमता का मूल्यांकन कर उसके अनुरूप शिक्षण रणनीति तैयार की जाए। इसके लिए शिक्षकों को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्राथमिक कक्षाओं पर विशेष ध्यान
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक कक्षाओं में विकसित होने वाली बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षताएं पूरे शैक्षणिक जीवन की नींव होती हैं। यदि किसी बच्चे की यह नींव कमजोर रह जाती है तो आगे की पढ़ाई में उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसी कारण अभियान के दौरान कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पढ़ने, लिखने, समझने और गणना करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता (Foundational Literacy and Numeracy) को शिक्षा व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार यह अभियान शुरू कर रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चों की सीखने की कमी को समय रहते दूर कर दिया जाए तो ड्रॉपआउट दर कम करने, परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने और छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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शिक्षकों की भूमिका होगी अहम
अभियान की सफलता काफी हद तक शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी। शिक्षकों को छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार शिक्षण सामग्री और अभ्यास गतिविधियां तैयार करनी होंगी। साथ ही समय-समय पर छात्रों की प्रगति का मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अभियान का वास्तविक लाभ मिल रहा है।
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शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान केवल कमजोर छात्रों को आगे लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र को अधिक समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जुलाई से शुरू होने वाले इस विशेष कार्यक्रम के जरिए लाखों छात्रों को अपनी शैक्षणिक कमियों को दूर करने का अवसर मिलेगा। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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