
गो-आधारित खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, CM योगी ने बताई विकास की कुंजी
Natural Farming: कानपुर में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती को देश के भविष्य और विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश का किसान समृद्ध, स्वस्थ और आत्मनिर्भर होगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए किसानों से प्राकृतिक और गो-आधारित खेती अपनाने का आह्वान किया।
कानपुर स्थित Chandra Shekhar Azad University of Agriculture and Technology में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि राज्य के 34 जिलों में विशेष अभियान चलाकर प्राकृतिक खेती को नई गति दी जाएगी।
#LIVE: प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन एवं अन्नदाता को नवीनतम तकनीक से जोड़ने हेतु ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ का आयोजन एवं प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों के सम्मान समारोह में सम्मिलित होते मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी https://t.co/1Kus67nCxV
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) June 18, 2026
वैश्विक संकट में भारत ने दिखाई मजबूती
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया ने ऊर्जा संकट, आर्थिक अस्थिरता और महंगाई जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, लेकिन भारत ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में इन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से किया आगाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है। इसके साथ ही मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि लोगों को स्वस्थ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने का भी दायित्व है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित में है।
34 जिलों में बनेगा प्राकृतिक खेती का मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। इस पहल के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करना भी है। इसके लिए कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और मूल्य संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
गो-आधारित खेती को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने गो-आधारित कृषि मॉडल को प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि भारतीय कृषि व्यवस्था में गाय का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने किसानों से जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।
उनका कहना था कि गो-आधारित खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होते हैं।
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कृषि और पर्यावरण दोनों को होगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती से रासायनिक लागत में कमी आती है और मिट्टी की जैविक क्षमता बेहतर होती है। इसके अलावा जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और यदि यहां बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को अपनाया जाता है तो यह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है।
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किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के साथ-साथ कृषि प्रसंस्करण, विपणन और तकनीकी नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
उन्होंने विश्वास जताया कि किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
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