
IWT पर पाकिस्तान को प्रियंका का करारा जवाब… लोन का पैसा सही जगह खर्च करें
IWT: सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और उसकी सरकारी प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाले वित्तीय संसाधनों का उपयोग अपने नागरिकों की भलाई और बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए, न कि भारत के खिलाफ बयानबाजी में ऊर्जा खर्च करनी चाहिए।
प्रियंका चतुर्वेदी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान में लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, महंगाई के कारण आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक जरूरत की वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से निम्न और मध्यम आय वर्ग पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है।
कब्रिस्तानों में भी जगह की कमी
पाकिस्तान के रावलपिंडी समेत कई शहरों में कब्रिस्तानों में जगह की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कई कब्रिस्तानों में नए दफन के लिए स्थान उपलब्ध नहीं है। कुछ स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट लिखा गया है कि दफनाने के लिए अब जगह नहीं बची है। इसके अलावा अंतिम संस्कार और दफन से जुड़ी लागत भी लगातार बढ़ने से गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
‘जनता की समस्याओं पर ध्यान दे पाकिस्तान’
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब देश आर्थिक संकट, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है, तब सरकार को अपने संसाधनों का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता का उद्देश्य आम नागरिकों की स्थिति सुधारना है, न कि राजनीतिक बयानबाजी को बढ़ावा देना।
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सिंधु जल संधि पर भी जारी है तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर हाल के दिनों में बयानबाजी तेज हुई है। दोनों देशों के नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि पड़ोसी देश को पहले अपने आंतरिक हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
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आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान
पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार, महंगाई, बेरोजगारी और वित्तीय संकट जैसे मुद्दों ने वहां की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहायता और आर्थिक सुधारों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना हुआ है।
प्रियंका चतुर्वेदी के इस बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और सिंधु जल संधि को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वहीं पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और आम लोगों की परेशानियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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