भारत पर ट्रंप का ‘टैरिफ वार’! रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका लगा सकता है 100% शुल्क…

US Tariff Hike Threat: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका अब और कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित बिल पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल के प्रावधानों से भारत समेत कई देशों पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

प्रस्तावित बिल में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को संभावित निशाने पर रखा गया है। यदि बिल कानून का रूप लेता है तो इन देशों से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

भारत समेत 5 देशों पर अमेरिका की नजर
बिल में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रस्ताव है। भारत और चीन समेत पांच देशों का नाम सामने आने के बाद इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासा ध्यान खींचा है।

अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और गैस की खरीद उसके राजस्व का बड़ा स्रोत है। इन ऊर्जा सौदों से रूस को आर्थिक मजबूती मिलती है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी युद्ध क्षमता को बनाए रखने में कर सकता है।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों का समर्थन
इस प्रस्ताव की खास बात यह है कि इसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि रूस के खिलाफ अमेरिकी नीति को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच व्यापक सहमति है।

बिल का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है।

पहले 500% टैरिफ का था प्रस्ताव
जानकारी के मुताबिक, बिल के शुरुआती मसौदे में रूस से जुड़े देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, बाद में इसमें बदलाव करते हुए प्रस्तावित टैरिफ को घटाकर 100 फीसदी कर दिया गया।

फिर भी 100 फीसदी टैरिफ का प्रावधान बेहद कड़ा माना जा रहा है। यदि यह लागू होता है तो प्रभावित देशों और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

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रूस के अधिकारियों और शैडो टैंकर बेड़े पर भी प्रतिबंध
प्रस्तावित बिल में केवल रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

शैडो टैंकर बेड़े के जरिए रूस के तेल कारोबार को जारी रखने की कोशिशों पर भी अमेरिका शिकंजा कसना चाहता है।

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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल खरीदता रहा है। रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।

ऐसे में यदि अमेरिकी संसद में पेश यह बिल आगे बढ़ता है और भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान लागू होता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है।

फिलहाल बिल संसद में पेश किया गया है और आगे इसकी प्रक्रिया जारी रहेगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिकी सीनेट और आगे की विधायी प्रक्रिया में इस प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी मिलती है।

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