‘ताहिया’ के बिना भगवान जगन्नाथ! पुरी रथ यात्रा की सदियों पुरानी परंपरा पर उठे सवाल…

Puri Rath Yatra Dispute: ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा इस बार धार्मिक आयोजन के साथ-साथ एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ की पारंपरिक ‘पाहंडी’ यात्रा में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब भगवान को उनके पारंपरिक पुष्प मुकुट ‘ताहिया’ के बिना ही रथ तक ले जाया गया। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

पाहंडी के दौरान बिना ताहिया दिखे महाप्रभु
रथ यात्रा के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल ‘पाहंडी’ के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर से उनके-अपने रथों तक ले जाया जाता है। इस दौरान महाप्रभु जगन्नाथ के सिर पर सजने वाला विशाल पुष्प मुकुट ‘ताहिया’ भक्तों के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।

हालांकि इस बार भगवान जगन्नाथ को नंदीघोष रथ तक ले जाते समय उनके सिर पर पारंपरिक ताहिया नजर नहीं आया। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। देखते ही देखते यह मामला धार्मिक परंपरा से निकलकर राजनीतिक विवाद में बदल गया।

भारी बारिश को बताया गया ताहिया हटाने का कारण
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि उस दिन भारी बारिश के कारण ताहिया पूरी तरह भीग गया था और काफी भारी हो गया था। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भगवान को बारिश से बचाने के लिए ‘गिलापा’ पहनाया गया था। लेकिन जब ताहिया पानी से भीगकर भारी हो गया तो सेवायतों को आशंका हुई कि इसे पहनाकर भगवान को ले जाने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से सेवायतों ने ताहिया हटाने का निर्णय लिया।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने स्पष्ट किया कि ताहिया हटाने का निर्णय प्रशासन का नहीं, बल्कि भगवान को ले जा रहे सेवायतों का था। उनका कहना था कि परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया।

BJD और कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला
मंदिर प्रशासन की सफाई के बावजूद विपक्षी दलों ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। बीजू जनता दल और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में जगन्नाथ संस्कृति और ओड़िया परंपराओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

विपक्ष ने सवाल उठाया कि पुरी की रथ यात्रा सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती है। ऐसे में भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक ताहिया के बिना पाहंडी में ले जाना आखिर क्यों जरूरी हुआ? विपक्षी नेताओं ने इसे करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया।

BJD और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ओडिशा की पहचान और ओड़िया अस्मिता का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए परंपराओं में किसी भी तरह के बदलाव को लेकर मंदिर प्रशासन और सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।

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‘ओड़िया अस्मिता पर हमला’ का आरोप
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को ओड़िया अस्मिता से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का आरोप है कि जगन्नाथ संस्कृति की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं और इन परंपराओं में बदलाव बेहद संवेदनशील विषय है।

विपक्षी दलों ने कहा कि श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की पाहंडी यात्रा को देखने के लिए दूर-दूर से पुरी पहुंचते हैं। उनके लिए ताहिया केवल एक पुष्प मुकुट नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में बिना ताहिया के महाप्रभु का रथ तक पहुंचना भक्तों के बीच स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

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धार्मिक परंपरा बनाम व्यावहारिक परिस्थिति
हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से बारिश और ताहिया के भारी होने की वजह बताई गई है, लेकिन इस मामले ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या धार्मिक परंपराओं में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किया जा सकता है? मंदिर प्रशासन इसे सेवायतों का व्यावहारिक निर्णय बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे परंपरा में गंभीर बदलाव मान रहा है।

फिलहाल ताहिया विवाद ने पुरी रथ यात्रा के धार्मिक माहौल के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक ओर मंदिर प्रशासन अपने फैसले को परिस्थितिजन्य बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे जगन्नाथ संस्कृति और ओड़िया अस्मिता से जोड़कर भाजपा सरकार पर हमलावर है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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