
देश बचाओ मोर्चा का आह्वान, भारत-अमेरिका FTA के खिलाफ किसान फिर सड़क पर…
Kisan Andolan News: देश में एक बार फिर किसान आंदोलन की आहट तेज हो गई है। प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक समेत कई राज्यों के किसान सड़कों पर उतर आए हैं। ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय किसान महापंचायत का आह्वान किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की संभावना है।
किसानों का कहना है कि यदि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू हुआ, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के किसानों और कृषि क्षेत्र को होगा। इसी आशंका को लेकर वे बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।
दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
महापंचायत और संभावित दिल्ली कूच को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शंभू और सिंघू बॉर्डर पर कंक्रीट बैरिकेड्स लगाकर निगरानी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे, जबकि किसान संगठन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की बात कह रहे हैं।
क्यों विरोध कर रहे हैं किसान?
किसान संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के बाद अमेरिका से मक्का, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद और अन्य कृषि वस्तुओं का आयात आसान हो जाएगा। उनका कहना है कि यदि सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में आने लगे, तो घरेलू किसानों की उपज को उचित कीमत नहीं मिल पाएगी।
किसानों का मानना है कि इससे स्थानीय मंडियों पर दबाव बढ़ेगा, फसलों के दाम गिरेंगे और छोटे तथा सीमांत किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ेगा।
MSP की कानूनी गारंटी की मांग फिर हुई तेज
FTA के विरोध के साथ-साथ किसान एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकार किसानों को MSP की कानूनी सुरक्षा देती है, तो बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर कम पड़ेगा।
उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए व्यापारिक समझौतों के साथ किसानों के हितों की भी समान रूप से रक्षा की जानी चाहिए।
पंजाब से लेकर यूपी और कर्नाटक तक आंदोलन
इस आंदोलन में केवल पंजाब या हरियाणा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्यों के किसान संगठन भी सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। कई स्थानों पर किसानों ने ट्रैक्टर रैलियां निकालीं और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
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कई किसान नेता हिरासत में
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले और दौरान पुलिस ने कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया। किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए प्रशासन दबाव की नीति अपना रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
छात्र आंदोलन के बाद बढ़ा विरोध
यह किसान आंदोलन ऐसे समय शुरू हुआ है जब एक दिन पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। किसान संगठनों ने छात्रों के समर्थन में भी आवाज उठाई है और कहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
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सरकार और किसानों के बीच बढ़ सकता है टकराव
यदि किसान संगठनों की महापंचायत के बाद आंदोलन का दायरा बढ़ता है और दिल्ली कूच की योजना आगे बढ़ती है, तो सरकार और किसानों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है, जबकि किसान संगठन अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि यदि सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर किसानों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेती और MSP की कानूनी गारंटी जैसे मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा। आने वाले दिनों में महापंचायत के फैसलों के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
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