पेपर लीक संशोधन बिल लोकसभा में पेश, छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे से सदन ठप…

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को पेपर लीक के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक (Public Examination Amendment Bill) लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के भारी विरोध और नारेबाजी के बीच यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया।
हालांकि बिल पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और NEET पेपर लीक विवाद को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
हंगामे के बीच पेश हुआ संशोधन विधेयक

सरकार का कहना है कि लोक परीक्षा संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। इस विधेयक के जरिए पेपर लीक, नकल माफिया, परीक्षा में तकनीकी छेड़छाड़ और संगठित अपराधों के खिलाफ कानून को और अधिक सख्त बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार पहले से लागू कानूनों का भी प्रभावी पालन कराने में विफल रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय नहीं होगी और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक केवल नया कानून लाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

छात्रों की पिटाई को लेकर विपक्ष का तीखा विरोध
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सांसदों ने “मोदी-शाह छात्रों से माफी मांगो” और “छात्रों पर अत्याचार बंद करो” जैसे नारे लगाए।

विपक्ष का आरोप है कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। विपक्ष सरकार से इस पूरे मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा और जवाब देने की मांग करता रहा।

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित
लगातार हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी स्थिति सामान्य नहीं हुई और विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।

इसी प्रकार राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध के चलते कोई विधायी कार्य सुचारु रूप से नहीं हो सका और सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।

संसद परिसर में भी विपक्ष का प्रदर्शन
सदन के भीतर विरोध के साथ-साथ संसद भवन के बाहर मकर द्वार पर भी विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया।

विपक्ष का कहना है कि लाखों छात्र लंबे समय तक परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संसद में जवाब देना चाहिए।

सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि पेपर लीक में शामिल संगठित गिरोहों के खिलाफ कई राज्यों में कार्रवाई की गई है और नई कानूनी व्यवस्था के माध्यम से भविष्य में ऐसे अपराधों पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।

सरकार का यह भी कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और कड़े दंडात्मक प्रावधानों के जरिए अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाएगी।

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धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे
इस बीच पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में NDA सांसदों ने उनका शॉल और मिथिला पाग पहनाकर स्वागत किया। सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए और उन्हें संसद भवन के अंदर तक साथ लेकर गए।

गौरतलब है कि NEET पेपर लीक विवाद के बीच 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद भी यह मुद्दा राजनीतिक रूप से लगातार गर्म बना हुआ है और विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

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परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने का संदेश
पेपर लीक संशोधन विधेयक संसद में पेश होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रमुख राजनीतिक विषय बना रहेगा। सरकार इस विधेयक को जल्द पारित कर परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है, जबकि विपक्ष छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक मामलों की जवाबदेही और सरकार की भूमिका पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग पर अड़ा हुआ है।

ऐसे में मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है, जबकि देशभर के लाखों छात्र इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार आगे कौन-कौन से ठोस कदम उठाती है।

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