
कम जमीन में ज्यादा मुनाफा! सरकार ने शुरू की हाई वैल्यू फसलों को बढ़ावा देने वाली योजना…
MIDH scheme: किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत अनुदान आधारित योजनाओं की शुरुआत कर दी है। विभाग ने जिले को विभिन्न योजनाओं के वार्षिक लक्ष्य मिलने के बाद किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, केला, पपीता, मसाला और औषधीय फसलों की खेती करने वाले किसानों को आकर्षक सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
उद्यान विभाग का कहना है कि बदलते समय में बागवानी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किसान आधुनिक और नकदी फसलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाएं। इसी उद्देश्य से कई फसलों पर अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।
पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को बढ़ावा देने पर जोर
कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए सरकार किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें कम क्षेत्रफल में बेहतर आमदनी हासिल की जा सके। बागवानी फसलें इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही हैं।
उद्यान विभाग का कहना है कि फल, मसाले और औषधीय पौधों की खेती से किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा इन फसलों के लिए कई क्षेत्रों में प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
इन फसलों की खेती पर मिलेगा अनुदान
MIDH योजना के तहत किसानों को कई प्रमुख फसलों के लिए सहायता दी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- स्ट्रॉबेरी की खेती: कम समय में तैयार होने वाली और बाजार में अधिक मांग वाली फसल।
- ड्रैगन फ्रूट उत्पादन: कम पानी में होने वाली आधुनिक फल फसल, जिसकी बाजार कीमत अच्छी रहती है।
- केले की खेती: बड़े पैमाने पर उत्पादन और बेहतर बाजार उपलब्धता वाली फसल।
- पपीता उत्पादन: कम समय में फल देने वाली लाभकारी बागवानी फसल।
- मसाला फसलें: किसानों को अतिरिक्त आय देने वाला क्षेत्र।
- औषधीय फसलें: बढ़ती मांग के चलते किसानों के लिए लाभकारी विकल्प।
पहले आवेदन, पहले लाभ
उद्यान विभाग ने किसानों से जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की है। विभाग के अनुसार लाभार्थियों का चयन “प्रथम आवक-प्रथम पावक” (First Come, First Served) के आधार पर किया जाएगा। यानी निर्धारित लक्ष्य पूरा होने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इसलिए इच्छुक किसानों को समय रहते विभागीय पोर्टल अथवा उद्यान विभाग के कार्यालय में संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
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बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना किसानों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में फल, सब्जी और औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और औषधीय पौधों जैसी फसलें कम क्षेत्र में भी अच्छी आय देने की क्षमता रखती हैं।
सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित करना है, जिनसे कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।
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आधुनिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे जिले में उच्च मूल्य वाली फसलों का रकबा बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
उद्यान विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे योजना की पूरी जानकारी प्राप्त कर समय पर आवेदन करें, ताकि सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर आधुनिक बागवानी और औषधीय खेती के जरिए अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकें।
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