
Tamil Nadu को पानी दिलाने बेंगलुरु जाएंगे विजय? मेकेदातू डैम पर सियासत गरमाई…
Cauvery Water Dispute: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच वर्षों से चले आ रहे कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इस बार विवाद की वजह बनी है मेकेदातू (Mekedatu) बांध परियोजना, जिस पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के संभावित कदम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री विजय इस विवाद के समाधान के लिए जल्द ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री से आमने-सामने बातचीत करने बेंगलुरु जा सकते हैं। हालांकि इस संभावित पहल को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
मेकेदातू परियोजना पर क्यों है विवाद?
मेकेदातू बांध परियोजना कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। कर्नाटक का कहना है कि इस परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल प्रबंधन बेहतर होगा। दूसरी ओर तमिलनाडु लगातार इसका विरोध करता रहा है। उसका तर्क है कि यदि बांध बनता है तो कावेरी नदी के जल प्रवाह पर असर पड़ेगा, जिससे राज्य के किसानों और सिंचाई व्यवस्था को नुकसान हो सकता है।
इसी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक लड़ाई चल रही है। मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण तक पहुंच चुका है।
सीधी बातचीत की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री जोसेफ विजय अब टकराव के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई साझा रास्ता निकालने का प्रयास कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि बातचीत से विवाद कम हो सकता है और जल बंटवारे को लेकर बेहतर समझ विकसित की जा सकती है।
विपक्ष ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री के इस संभावित कदम पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि तमिलनाडु के जल अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार का रुख कमजोर दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि सरकार को कानूनी और संवैधानिक रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए, न कि ऐसे कदम उठाने चाहिए जिनसे तमिलनाडु की स्थिति कमजोर पड़ने का संदेश जाए।
कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि यदि बातचीत होती है तो उसमें तमिलनाडु के किसानों के हितों और राज्य के जल अधिकारों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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किसानों की भी बढ़ी चिंता
कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की नजरें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हैं। उनका कहना है कि खेती पूरी तरह कावेरी के पानी पर निर्भर है और किसी भी नई परियोजना से यदि जल प्रवाह प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। किसान संगठनों ने सरकार से राज्य के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
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राजनीतिक और कूटनीतिक परीक्षा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री विजय वास्तव में कर्नाटक जाकर बातचीत करते हैं तो यह केवल जल विवाद का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि उनकी राजनीतिक नेतृत्व क्षमता और अंतरराज्यीय संबंधों को संभालने की परीक्षा भी होगी। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगा।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित बातचीत कब होती है और क्या इससे वर्षों पुराने कावेरी जल विवाद और मेकेदातू परियोजना पर कोई ठोस समाधान निकल पाता है या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रूप ले लेता है।
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