
ट्रंप का ड्रीम प्रोजेक्ट हुआ ‘OUT’! व्हाइट हाउस बॉलरूम पर कोर्ट ने लगाई रोक…
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित विशाल बॉलरूम के निर्माण को लेकर अदालत से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल अपील कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को इस परियोजना के ऊपर-जमीन वाले निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर व्हाइट हाउस में बदलाव करने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी।
डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट की तीन जजों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। अदालत ने ऐतिहासिक संरक्षण से जुड़े संगठन नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन की याचिका पर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दिया। संगठन ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने कांग्रेस की अनुमति के बिना व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को हटाकर नए बॉलरूम का निर्माण शुरू कर दिया।
करीब 400 मिलियन डॉलर का है प्रोजेक्ट
ट्रंप का प्रस्तावित बॉलरूम करीब 90,000 वर्ग फुट का बताया जा रहा है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 400 मिलियन डॉलर है। यह भारतीय मुद्रा में करीब 3,500 करोड़ रुपये बैठती है। इस परियोजना के लिए व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को हटाया गया था।
ट्रंप लंबे समय से व्हाइट हाउस में एक बड़े बॉलरूम की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उनका तर्क रहा है कि व्हाइट हाउस में बड़े आधिकारिक समारोहों और विदेशी मेहमानों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि परियोजना पर करदाताओं का बोझ नहीं पड़ेगा और इसके लिए निजी दान का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अपील कोर्ट का मूल सवाल यह था कि क्या राष्ट्रपति को अकेले व्हाइट हाउस की संरचना में इतना बड़ा बदलाव करने का अधिकार है। बहुमत ने माना कि इस मामले में कांग्रेस की भूमिका जरूरी है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इतने बड़े बॉलरूम का निर्माण किया जाना चाहिए या नहीं, यह फैसला कांग्रेस को करना है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला परियोजना की उपयोगिता या नीति के स्तर पर समर्थन या विरोध नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रपति की कानूनी शक्तियों से जुड़ा सवाल है।
यानी अदालत ने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि व्हाइट हाउस में बॉलरूम कभी बनाया ही नहीं जा सकता। अदालत का कहना है कि अगर इसे बनाया जाना है तो प्रशासन को जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा और कांग्रेस की मंजूरी हासिल करनी होगी।
‘राष्ट्रपति व्हाइट हाउस के मालिक नहीं’
इस मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रपति की शक्तियों और व्हाइट हाउस के स्वामित्व को लेकर भी अहम सवाल उठा। अदालत की बहुमत राय का सार यह है कि राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में रहने वाले संवैधानिक पदाधिकारी हैं, लेकिन उन्हें भवन में मनमाने ढंग से बड़े बदलाव करने का असीमित अधिकार नहीं है।
यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसके जरिए राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकारों की सीमा को भी परखा जा रहा है।
ऐतिहासिक इमारत को लेकर पहले से विवाद
बॉलरूम परियोजना की शुरुआत से ही विवादों में रही है। ट्रंप प्रशासन ने व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को हटाकर वहां नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू की। ऐतिहासिक संरक्षण समूहों ने इसका विरोध किया और अदालत का रुख किया।
मामले में पहले भी निचली अदालत और अपील कोर्ट के स्तर पर निर्माण को लेकर अलग-अलग आदेश सामने आ चुके हैं। अप्रैल 2026 में भी निर्माण कार्य को लेकर अदालतों में महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई हुई थी।
ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता
हालांकि इस फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन के पास अगला कानूनी रास्ता खुला हुआ है। अपील कोर्ट ने अपने आदेश को दो सप्ताह के लिए प्रभावी होने से रोक रखा है ताकि प्रशासन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे।
इसका मतलब है कि फिलहाल बॉलरूम का निर्माण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन ऊपर-जमीन का निर्माण अदालत के आदेश के कारण रुकना होगा। वहीं परियोजना से जुड़े कुछ भूमिगत सुरक्षा कार्यों को लेकर अलग स्थिति बनी हुई है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा का भी दिया गया तर्क
ट्रंप प्रशासन ने अदालत में यह तर्क भी दिया है कि परियोजना से जुड़े कुछ निर्माण कार्य व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं। प्रशासन का कहना है कि निर्माण रोकने से सुरक्षा संबंधी काम प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि, अदालत के बहुमत ने राष्ट्रपति के व्यापक कार्यकारी अधिकार के दावे को स्वीकार नहीं किया। इस मामले में एक जज ने असहमति जताते हुए प्रशासन के पक्ष में राय दी और कहा कि सरकार के पास निर्माण आगे बढ़ाने के लिए कानूनी आधार है तथा सुरक्षा से जुड़े हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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आगे की कार्रवाई
अब इस मामले की अगली बड़ी लड़ाई अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन की अपील पर रोक हटाता है तो निर्माण दोबारा तेजी पकड़ सकता है। वहीं यदि निचली अदालतों का फैसला बरकरार रहता है तो ट्रंप प्रशासन को कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेने की जरूरत पड़ेगी।
इस तरह करीब 400 मिलियन डॉलर का व्हाइट हाउस बॉलरूम अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रह गया है। यह राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों, कांग्रेस के अधिकार और अमेरिका की ऐतिहासिक सरकारी इमारतों में बदलाव की कानूनी सीमाओं को लेकर महत्वपूर्ण मामला बन गया है।
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