
Delimitation बैठक पर विपक्ष एकजुट, DMK-AIADMK समेत कई दलों ने बनाई दूरी
Tamil Nadu: तमिलनाडु में परिसीमन के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय की ओर से शनिवार, 8 अगस्त, को बुलाई गई सांसदों की बैठक से सत्तारूढ़ DMK और मुख्य विपक्षी दल AIADMK ने दूरी बना ली। दोनों दलों के सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए।
इस बैठक का उद्देश्य परिसीमन को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और साझा रणनीति तैयार करना बताया गया था। हालांकि, बड़े दलों के बहिष्कार से बैठक को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
DMK के सभी 30 सांसदों ने किया बहिष्कार
बैठक के बहिष्कार में DMK सबसे आगे रही। पार्टी के सभी 30 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाई। DMK सांसद कनिमोझी ने बैठक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे महज ‘दिखावा’ करार दिया।
कनिमोझी के मुताबिक, इस बैठक के जरिए राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने खास तौर पर कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध के मुद्दे का उल्लेख किया।
AIADMK ने भी नहीं लिया हिस्सा
मुख्य विपक्षी दल AIADMK ने भी मुख्यमंत्री की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। पार्टी के चार सांसदों ने कार्यक्रम से दूरी बनाई।
इस तरह तमिलनाडु की राजनीति के दो प्रमुख दलों के बैठक से बाहर रहने के कारण परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बुलाई गई बैठक की व्यापकता पर सवाल उठने लगे हैं।
PMK, MNM और DMDK भी बहिष्कार में शामिल
DMK और AIADMK के अलावा कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने भी बैठक से दूरी बनाई। इनमें PMK, MNM और DMDK शामिल हैं। इन दलों के लोकसभा में एक-एक सांसद बताए गए हैं।
इससे साफ है कि बैठक को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच एकराय नहीं बन पाई है।
परिसीमन को लेकर तमिलनाडु में चिंता
परिसीमन यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का पुनर्निर्धारण दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए लंबे समय से संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है।
तमिलनाडु के राजनीतिक दलों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर रही है कि यदि भविष्य में सीटों का पुनर्विन्यास जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों के बीच भी समय-समय पर साझा चिंता सामने आती रही है।
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कावेरी और मेकेदातु का मुद्दा भी उठा
DMK की ओर से बैठक के बहिष्कार को केवल परिसीमन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। कनिमोझी ने कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए बैठक के उद्देश्य पर सवाल उठाया।
कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। वहीं, कर्नाटक की मेकेदातु परियोजना को लेकर भी तमिलनाडु लगातार आपत्ति जताता रहा है।
DMK का आरोप है कि ऐसे अहम राज्यहित के मुद्दों के बीच परिसीमन बैठक को प्राथमिकता देना महज राजनीतिक दिखावा है।
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बैठक के बहिष्कार से बढ़ी सियासी तल्खी
मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में प्रमुख दलों की गैरमौजूदगी से तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ परिसीमन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच चर्चा की जरूरत महसूस की जा रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल ही इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक से बाहर हैं।
अब सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु के राजनीतिक दल परिसीमन के मुद्दे पर भविष्य में किसी साझा मंच पर एकजुट होंगे या राज्य की राजनीति में यह मुद्दा अलग-अलग दलों के राजनीतिक रुख का हिस्सा बना रहेगा।
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