विजयदशमी 2020: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है यह पर्व
विजयदशमी पर शस्त्र पूजा का है विशेष महत्व

विजयदशमी पर शस्त्र पूजा का है विशेष महत्व
विजयदशमी पर्व की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शारदीय नवरात्र के दसवें दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस बार यह 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है।
बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक, इस त्योहार से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं। इसी दिन अच्छाई की जीत ने रावण का वध किया था। यह भी मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था।

देशभर में इसे अलग-अलग नामों, अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसे आयुध पुजाई के नाम से जाना जाता है। वहीं महाराष्ट्र में इसे खंडे नवमी के नाम से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे शस्त्र पूजन नाम से जाना जाता है।
क्यों किया जाता है शस्त्र पूजन
दशहरा के दिन शस्त्र पूजन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को शस्त्र पूजन का किया जाता है।
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के पूजन के बाद दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी पर मां दुर्गा का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं।
भारत की रियासतों में शस्त्र पूजन धूम-धाम से मनाया जाता था। अब रियासतें तो नही रहीं लेकिन परंपराएं शाश्वत हैं।
यही कारण है कि इस दिन आत्मरक्षार्थ रखे जाने वाले शस्त्रों की भी पूजा की जाती है। हथियारों की साफ-सफाई की जाती है और उनका पूजन होता है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए।
इस बार विजयदशमी पूजा का शुभ मुहूर्त
दशमी तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर, 7:41 मिनट
विजय मुहूर्त: दोपहर 1-55 से 2:40 तक
अपराह्न पूजा मुहूर्त: 01:11 से लेकर 03:24 मिनट
दशमी तिथि समाप्ति: 26 अक्टूबर को सुबह 8:59 मिनट तक




