
अंबेडकर प्रतिमा विवाद में एक्शन… दरोगा सस्पेंड, आरोपियों के शस्त्र लाइसेंस होंगे निरस्त
Lucknow News: राजधानी के बंथरा थाना क्षेत्र स्थित शिवपुरा अंबेडकरनगर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण को लेकर हुआ विवाद बुधवार को हिंसक झड़प में बदल गया। दो दलित गुटों के बीच हुए इस टकराव ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
पहले से तय था कार्यक्रम, फिर भी चूक
जानकारी के अनुसार, माल्यार्पण का कार्यक्रम पहले से प्रस्तावित था और इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। यही लापरवाही बाद में विवाद बढ़ने की एक बड़ी वजह बनी।
कहासुनी से झड़प तक
कार्यक्रम के दौरान माल्यार्पण को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई, जो जल्द ही झड़प में बदल गई। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि समय रहते पुलिस बल के पहुंचने से मामला और ज्यादा नहीं बिगड़ा।
दरोगा की भूमिका पर सवाल, तत्काल निलंबन
जांच में सामने आया कि क्षेत्र के दरोगा विपिन कुमार घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि यह कार्यक्रम पहले से तय था। उनकी अनुपस्थिति को गंभीर लापरवाही मानते हुए डीसीपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
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पुलिस का सख्त रुख
डीसीपी ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस आरोपियों के लाइसेंसी हथियारों की भी जांच कर रही है। जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना के बाद शिवपुरा अंबेडकरनगर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ संवाद भी स्थापित किया जा रहा है।
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अफवाहों से बचने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रहेगी।
यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि संवेदनशील सामाजिक आयोजनों में प्रशासन की सक्रियता और जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। समय रहते उचित कदम उठाए जाएं तो ऐसे विवादों को बड़े टकराव में बदलने से रोका जा सकता है।
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