
CM पद की दौड़ में बड़ा उलटफेर, केसी वेणुगोपाल को पीछे छोड़ आगे निकले सतीशन…
विधायकों में क्यों बढ़ा सतीशन का समर्थन?
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कई विधायक “दिल्ली बनाम केरल” की बहस में स्थानीय चेहरे के पक्ष में खड़े दिखे। उनका मानना है कि राज्य की राजनीति को समझने वाला और लगातार जनता के बीच सक्रिय नेता ही पार्टी को सत्ता तक पहुंचा सकता है।
सतीशन की सबसे बड़ी ताकत यह मानी जा रही है कि उन्होंने गुटबाजी से परेशान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। युवा नेताओं का एक बड़ा वर्ग भी उनके साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
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फिर पीछे क्यों पड़े केसी वेणुगोपाल?
केसी वेणुगोपाल संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं, लेकिन विरोधी खेमे का आरोप है कि उनकी राजनीति ज्यादा “हाईकमान केंद्रित” रही है। राज्य इकाई के कुछ नेताओं को आशंका है कि यदि उन्हें सीएम चेहरा बनाया गया तो स्थानीय नेतृत्व कमजोर पड़ सकता है।
इसके अलावा, केरल कांग्रेस में ए और आई ग्रुप की पुरानी गुटबाजी भी इस मुकाबले में असर डाल रही है। कई वरिष्ठ नेता संतुलन साधने के लिए ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके।
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हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती
कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव में पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाए।
- अगर हाईकमान केसी वेणुगोपाल को आगे करता है, तो संगठनात्मक मजबूती का संदेश जाएगा।
- वहीं सतीशन को मौका देने पर पार्टी “स्थानीय नेतृत्व” और आक्रामक विपक्ष की लाइन पर आगे बढ़ती दिखेगी।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले महीनों में कांग्रेस आलाकमान का फैसला सिर्फ केरल की राजनीति ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में पार्टी की रणनीति भी तय करेगा।
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