
Breach Candy Club की सदस्यता नीति पर विवाद, शशि थरूर ने बताया अनुभव
Breach Candy Club एक बार फिर अपनी कथित नस्लभेदी सदस्यता नीति को लेकर विवादों में घिर गया है। मुंबई का यह प्रतिष्ठित और बेहद एलीट क्लब इस समय सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवाद की वजह क्लब की वह नीति है, जिसके तहत ट्रस्ट की सदस्यता केवल यूरोपीय पासपोर्ट धारकों को ही दिए जाने की बात सामने आई है। इस नीति को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और इसे भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।
शशि थरूर ने साझा किया पुराना अनुभव
इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर अपना पुराना अनुभव साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया।
थरूर ने बताया कि वर्षों पहले उन्हें भी क्लब में नस्लीय आधार पर अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने संकेत दिया कि क्लब की मानसिकता लंबे समय से औपनिवेशिक दौर जैसी बनी हुई है।
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर क्लब की सदस्यता नीति को लेकर बहस और तेज हो गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी किसी भारतीय शहर में ऐसी नीति कैसे लागू हो सकती है।
There is absolutely no acceptable justification for a racist provision to survive on government land. To say the club’s constitution requires it is ridiculous. What about our country’s constitution? https://t.co/MtsWmH0rVI
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) May 27, 2026
क्या है विवादित सदस्यता नीति?
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्लब के ट्रस्ट से जुड़ी सदस्यता के लिए यूरोपीय पासपोर्ट की शर्त रखी गई है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति नस्ल और राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती है।
हालांकि क्लब की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामले ने सोशल मीडिया पर बड़ा रूप ले लिया है।
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सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने क्लब की आलोचना शुरू कर दी। कई यूजर्स ने इसे “औपनिवेशिक मानसिकता” बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे नियम भारतीय संविधान की समानता की भावना के खिलाफ हैं।
कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी संस्था को भारत में संचालित होने की अनुमति है, तो उसकी सदस्यता नीति में भारतीयों के साथ भेदभाव कैसे स्वीकार किया जा सकता है।
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पहले भी विवादों में रहा है क्लब
ब्रीच कैंडी क्लब लंबे समय से मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता रहा है। हालांकि अतीत में भी इस पर एलीटिज्म और चयनात्मक सदस्यता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब एक बार फिर यह मामला सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है और कई सामाजिक व राजनीतिक वर्ग इस नीति पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
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