
पूर्वोत्तर सुरक्षा पर बड़ा दांव! चीन से पहले भारत दौरे पर म्यांमार के नए राष्ट्रपति…
India Myanmar: भारत और म्यांमार के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद दिखाई दे रही है। म्यांमार के नए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन की बजाय भारत को चुना है। उनकी यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिन आंग ह्लाइंग रविवार को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। चीन और म्यांमार के लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं, इसलिए भारत को पहली विदेश यात्रा के लिए चुनना एक बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।
‘मिशन 2029’ से जुड़ी उम्मीदें
केंद्र सरकार के लिए यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसे ‘मिशन 2029’ से जोड़कर देखा जा रहा है। मिशन 2029 का मकसद पूर्वोत्तर भारत से उग्रवाद और सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह खत्म करना माना जा रहा है।
भारत और म्यांमार के बीच करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा है। यह सीमा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़ी हुई है। लंबे समय से भारत विरोधी उग्रवादी संगठन म्यांमार सीमा के आसपास सक्रिय रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग भारत के लिए बेहद अहम है।
सीमा सुरक्षा और उग्रवाद पर होगी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान सीमा सुरक्षा, उग्रवादी संगठनों पर कार्रवाई, खुफिया जानकारी साझा करने और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
भारत पहले भी म्यांमार की सेना के साथ मिलकर कई संयुक्त अभियान चला चुका है। माना जा रहा है कि नई सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और मजबूत हो सकता है।
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चीन को कूटनीतिक संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि मिन आंग ह्लाइंग का पहला विदेशी दौरा भारत होना चीन के लिए भी एक संकेत है। चीन लंबे समय से म्यांमार में निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामरिक परियोजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करता रहा है।
ऐसे में भारत के साथ बढ़ती नजदीकी यह दिखाती है कि म्यांमार अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत भी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत म्यांमार को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानता है।
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व्यापार और कनेक्टिविटी पर भी फोकस
इस यात्रा के दौरान व्यापार, सड़क संपर्क, सीमा व्यापार और पूर्वोत्तर राज्यों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत लंबे समय से कलादान मल्टी-मॉडल प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे जैसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत और म्यांमार के रिश्ते मजबूत होते हैं तो इसका सीधा फायदा पूर्वोत्तर भारत के विकास और सुरक्षा दोनों को मिल सकता है।
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