
कुशीनगर में फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर और बिना पंजीकरण अस्पतालों का खेल…
UP news: कप्तानगंज कस्बा (कुशीनगर) में वर्षों से स्वास्थ्य क्षेत्र में अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं। स्थानीय लोग और मरीज बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि यहाँ कई अल्ट्रासाउंड सेंटर और छोटे-बड़े अस्पताल बिना वैध रजिस्ट्रेशन, बिना योग्य डॉक्टर और बिना सरकारी अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय मीडिया ख़बरों के मुताबिक, कई ऐसे सेंटर हैं जहाँ:
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पंजीकृत डॉक्टर मौजूद नहीं रहते हैं और जाँच नियमित रूप से असफल डॉक्टर या प्रशिक्षित नर्स द्वारा की जाती है।
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अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जाँच बिना योग्य रेडियोलॉजिस्ट के संचालित होती है।
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कई छोटे अस्पतालों का कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है, और वे कभी-कभी सील करने की कार्रवाई के बाद कुछ ही समय में फिर से खोल दिए जाते हैं।
🏥 स्वास्थ्य विभाग की आधी-अधूरी कार्रवाई
पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन ने कुछ ऐसे स्थानों पर सेंटरों और मेडिकल सुविधाओं को सील भी किया है, जैसे कि किसी मेडिकल स्टोर को बिना लाइसेंस चलाने पर सील किया जाना।
एक अलग मामले में, हर्ष डायग्नोसिस सेंटर के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने जाँच की थी कि वहाँ पंजीकृत डॉक्टर की अनुपस्थिती में अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं और संचालक को जवाब देने को कहा गया था।
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कार्रवाइयाँ प्रदर्शन मात्र हैं, जिनका मकसद जनता को दिखाना और औपचारिकता पूरी करना भर है, न कि समस्या का निराकरण। आरोप है कि जाँच टीम आती है, एक-दो सेंटर सील कर देती है, कुछ दिनों बाद वही सेंटर वापस चालू हो जाते हैं।
🧑⚕️ जनता की आशंकाएँ और जोखिम
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे सेंटरों में इलाज करवाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन गया है:
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गलत रिपोर्ट,
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गैर-पेशेवर जांच,
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गर्भवती महिलाओं और अन्य रोगियों के साथ खिलवाड़,
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स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सही समय पर पता न चलना— ये सभी चिंताएँ सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या 193 के आसपास है, लेकिन 500 से अधिक अस्पताल संचालित बताये जाते हैं, जिनमें से कई के पास वैध रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। इन अस्पतालों में डॉक्टर अपने नाम से रजिस्ट्रेशन देकर उसे किराये पर लेकर संचालकों को देना जारी रखते हैं।
🧾 प्रशासनिक जवाबदेही और निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार, गुणवत्ता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देते रहे हैं।
लेकिन:
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स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन की कमी,
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स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की धीमी कार्रवाई,
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और निगरानी की कमजोर प्रणाली जैसी कमजोरियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
इन सबके चलते स्थानीय लोगों का विश्वास सरकारी प्रणाली पर टूटता जा रहा है।
📌 खास बिंदु
✔️ अल्ट्रासाउंड जैसे संवेदनशील जाँच को योग्य डॉक्टर द्वारा करने और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता होती है।
✔️ बिना पंजीकरण चलने वाले अस्पतालों और सेंटरों पर स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक कार्रवाई आवश्यक है।
✔️ केवल कागजी कार्रवाई और एक-दो सीलिंग से समस्या का समाधान नहीं होगा।
कप्तानगंज में स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियाँ गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे में न केवल स्वास्थ्य विभाग को कठोरता से कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि स्थानीय प्रशासन को नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। केवल दिखावटी कार्रवाई या खानापूर्ति से सरकार और प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े होते हैं।





