
Ganesh Utsav 2025: जावरा की प्रतिमा ने लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में बनाई जगह
Ganesh Utsav 2025: गणेशोत्सव 2025 के अवसर पर जावरा में ‘ज्वाला श्री गणेश उत्सव समिति’ ने इतिहास रच दिया। समिति द्वारा तैयार की गई 22 फीट ऊंची, 10 फीट चौड़ी और 6 फीट मोटी मिट्टी की गणेश प्रतिमा को ‘चौपाटी के राजा’ के नाम से जाना जाता है और इसे लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला।
यह उपलब्धि मध्य प्रदेश सरकार के ‘माटी के गणेश’ अभियान से प्रेरित होकर हासिल की गई। इस प्रतिमा को मृदा आकृति मूर्ति आर्ट्स, उज्जैन ने तैयार किया। निर्माण में बंगाल के 10 कारीगरों ने तीन महीने की कठिन मेहनत की। समिति ने प्रतिमा को विश्व रिकॉर्ड के लिए नामांकित किया था और इसे चयनित कर लिया गया।
समिति सदस्य राकेश राठौड़ ने बताया कि यह प्रतिमा न केवल जावरा बल्कि एशिया की सबसे बड़ी मिट्टी की गणेश प्रतिमा है। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया में जहां अन्य मूर्तियां पीओपी से बनाई जा रही हैं, वहीं हमने श्री गणेश की मूर्ति पूरी तरह गंगा की मिट्टी से तैयार की। इस उपलब्धि का पूरा श्रेय समिति के सभी सदस्यों को जाता है।”
समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम
समिति द्वारा नौ दिनों का रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्कूली बच्चों की भागीदारी और कवि सम्मेलन शामिल थे। लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ज्यूरी ने इस अवसर पर विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय और समिति के सदस्यों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। ज्यूरी में शैलेंद्र सिंह सिसोदिया, धरम यादव और मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय उपस्थित थे।
विधायक डॉ. पांडेय ने इस उपलब्धि को न केवल समिति की, बल्कि पूरे जावरा विधानसभा और मध्य प्रदेश की गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समिति की प्रतिबद्धता और भविष्य
समिति ने कहा कि वे भविष्य में भी जावरा और मध्य प्रदेश में मिट्टी की मूर्तियों और पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रहेंगे। राठौड़ ने कहा कि यह उपलब्धि शहरवासियों के लिए गर्व का क्षण है और आने वाले वर्षों में जावरा की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
इस प्रकार, ‘चौपाटी के राजा’ न केवल जावरा का गौरव बढ़ाने वाली मूर्ति बन गई है, बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय मिट्टी कला की पहचान बनाने में भी सफल रही है।





