
देशभर में फैला GST फर्जीवाड़ा… 23 राज्यों तक फैला नेटवर्क, बढ़ा साइबर खतरा
GST Registration Fraud: भारत के कर प्रणाली में पारदर्शिता और डिजिटल सत्यापन के तमाम दावों के बीच एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसने जीएसटी प्रशासन की जड़ों को झकझोर दिया है। जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि फर्जी जीएसटी पंजीकरण (GST Registration Fraud) के जरिए देशभर में अरबों रुपये की कर चोरी की जा रही है।
23 राज्यों में फैला फर्जीवाड़े का नेटवर्क
यह सिंडीकेट किसी एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं है — 23 राज्यों में इसकी जड़ें फैली पाई गई हैं।
लखनऊ में पंजीकृत एक फर्म के पते से जांच शुरू हुई और वहीं से इस विशाल नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। जांच में पता चला कि जिन दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराया गया, वे किसी और व्यक्ति के नाम पर थे।
दस्तावेज़ों में फोटोशॉप से हेराफेरी
फर्जीवाड़े का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जालसाज बिजली बिल, आधार कार्ड, पैन कार्ड और संपत्ति की रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ों में फोटोशॉप के जरिए मामूली बदलाव कर इन्हें “नए दस्तावेज़” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
करीब 80 प्रतिशत फर्जी फर्मों में दूसरों के दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी का दुरुपयोग पाया गया है।
फर्जी इनवॉइस से अरबों की कर चोरी
पंजीकरण के बाद यह नेटवर्क फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का खेल शुरू करता है। बिना किसी वास्तविक लेन-देन या माल की आपूर्ति के कागज़ों पर करोड़ों का व्यापार दिखाया जाता है।
इन फर्जी बिलों के ज़रिए टैक्स क्रेडिट का दावा किया जाता है, जिससे सरकार को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
यूपी में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े के मामले
उत्तर प्रदेश में बीते एक साल के भीतर राज्य कर (SGST) और केंद्रीय कर (CGST) विभागों ने 2,500 से अधिक फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ किया है।
* इन फर्मों के ज़रिए लगभग 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का अनुमान है।
* केवल लखनऊ, नोएडा, कानपुर और वाराणसी में ही 700 से ज्यादा फर्जी पंजीकरण सामने आए हैं।
फर्जी दस्तावेजों का प्रतिशत
- बिजली बिल – 60%
- आधार कार्ड – 55%
- पैन कार्ड – 50%
- रजिस्ट्री फोटोकॉपी – 40%
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नई सुरक्षा व्यवस्था लागू
राज्य कर विभाग ने अब सभी जिलों में डिजिटल वेरिफिकेशन और फिजिकल इंस्पेक्शन को अनिवार्य कर दिया है।
साथ ही, जीएसटी नेटवर्क (GSTN) पोर्टल पर फेस ऑथेंटिकेशन, लाइव लोकेशन टैगिंग और रीयल-टाइम डॉक्यूमेंट ट्रेसिंग जैसी तकनीकें लागू की जा रही हैं।
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कर चोरी से बढ़कर साइबर खतरा
अधिकारियों का कहना है कि अब यह सिर्फ टैक्स चोरी का मामला नहीं रहा, बल्कि यह डेटा सुरक्षा और साइबर अपराध का गंभीर खतरा बन गया है।
इस जाल में फंसने वाले कई निर्दोष नागरिकों की पहचान भी दुरुपयोग की गई है, जिससे यह अपराध आर्थिक के साथ-साथ मानवीय संकट का रूप ले रहा है।
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