‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता…’, गालियों वाले VIDEO पर सोनम वांगचुक का बड़ा बयान

Sonam Wangchuk: NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ अपशब्दों वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रदर्शन में इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर स्पष्ट आपत्ति जताई, लेकिन साथ ही इसे युवाओं में बढ़ती निराशा और हताशा का संकेत भी बताया।

एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में सोनम वांगचुक से जब विरोध प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुई आपत्तिजनक भाषा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में गाली-गलौज या अभद्र भाषा का समर्थन नहीं करते। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक विरोध हमेशा मर्यादित और सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इन घटनाओं को केवल अनुशासनहीनता के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि आखिर युवाओं में इतना गुस्सा और निराशा क्यों है। वांगचुक के मुताबिक, यह केवल कुछ लोगों की नाराजगी नहीं बल्कि बड़ी संख्या में छात्रों की मानसिक स्थिति को दर्शाता है।

‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता…’
सोनम वांगचुक ने कहा, “अगर मैं प्रधानमंत्री की जगह होता, तो सबसे पहले खुद से पूछता कि मैंने ऐसा क्या किया है जिससे युवाओं में इतना गुस्सा पैदा हो गया।” उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए कि पढ़े-लिखे और भविष्य की तैयारी कर रहे छात्र इतनी बड़ी संख्या में सड़क पर उतरने को क्यों मजबूर हो रहे हैं।

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‘ये प्रोफेशनल प्रदर्शनकारी नहीं हैं’
वांगचुक ने यह भी कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, ये कोई पेशेवर प्रदर्शनकारी या उपद्रवी तत्व नहीं हैं, बल्कि देश के अलग-अलग कोर्सों में पढ़ने वाले छात्र हैं, जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित और निराश हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं और समस्याओं को गंभीरता से सुनने की जरूरत है।

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सरकार के लिए दिया संदेश
सोनम वांगचुक ने सरकार से अपील की कि वह युवाओं की नाराजगी को समझने का प्रयास करे और संवाद के जरिए समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन इसे सही दिशा देने की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है। साथ ही उन्होंने युवाओं से भी आग्रह किया कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण और मर्यादित भाषा में रखें ताकि उनकी आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सुनी जा सके।

नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और इस बीच सोनम वांगचुक का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा का विषय बन गया है।

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