दिल्ली के बुलडोजर एक्शन पर विरोध; एक्शन और टाइमिंग…सोची-समझी साजिश…

Delhi Bulldozer Action: प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने दिल्ली की हालिया बुलडोजर की घटना को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने दिल्ली नगर निगम रामलीला मैदान–तुर्कमान गेट क्षेत्र में मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए अभियान पर सवाल उठाया और साजिश करार दिया.

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि यह एक गंभीर सवाल है कि जब भी प्रशासन सड़क चौड़ीकरण या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है, तो बुलडोजर मस्जिदों और दरगाहों के आसपास ही क्यों चलता दिखाई देता है.

उन्होंने कहाकि यह महज इत्तेफाक है या किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा, इस पर गंभीर मंथन की जरूरत है.

दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय लोगों द्वारा एमसीडी पर पथराव के आरोप भी सामने आए हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना सुफियान निजामी ने कहाकि यदि प्रशासन पहले स्थानीय लोगों को भरोसे में लेकर कार्रवाई करता, तो हालात इस कदर नहीं बिगड़ते.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट का सम्मान सभी करते हैं, स्थानीय लोग भी न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं, लेकिन संवाद और विश्वास के बिना की गई कार्रवाई से टकराव की स्थिति पैदा होती है.

मौलाना सुफियान ने कहाकि अब जो वीडियो सामने आ रहे हैं, उनमें पथराव की बातें कही जा रही हैं, ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि दोषियों की सही पहचान की जाए.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बुलडोजर और पथराव की आड़ में किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना बड़ी नाइंसाफी होगी. इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने मांग की है कि प्रशासन संवेदनशील मामलों में संयम, संवाद और संविधान के दायरे में रहकर कदम उठाए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे.

उन्होंने कहाकि किसी को भी संविधान को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. विरोध दर्ज कराने का एक संवैधानिक तरीका होता है और यदि किसी को आपत्ति है, तो उसे कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए.

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