Viral News: PM के जाते ही लखनऊ में गमलों की लूट, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

Lucknow News: पीएम नरेंद्र मोदी के लखनऊ दौरे के बाद राजधानी की तस्वीर उस वक्त शर्मनाक हो गई, जब प्रेरणा स्थल कार्यक्रम के लिए की गई भव्य सजावट लोगों की लालच की भेंट चढ़ गई।

Lucknow News: यूपी की राजधानी लखनऊ में 25 दिसंबर यानि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस मौके पर पूरे इलाके को भव्य रूप से सजाया गया था। प्रेरणा स्थल से लेकर आसपास के मार्गों तक फूल-पौधों, गमलों और हैंगिंग वॉल के जरिए हरियाली का सुंदर नजारा देखने को मिला। नगर निगम की ओर से स्थल मार्ग, वसंत कुंज रोड और ग्रीन कॉरिडोर पर बड़ी संख्या में छोटे-छोटे गमले लगाए गए थे, ताकि प्रधानमंत्री के स्वागत और कार्यक्रम को खास बनाया जा सके।

वीडियो में कैद हुई शर्मिंदगी

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास लगाए गए बड़े-बड़े सजावटी गमलों को लोग बेझिझक उठाकर ले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये लोग पैदल नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी गाड़ियों एसयूवी और कारों  में गमले भरकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। न कोई डर, न कोई संकोच, मानो सार्वजनिक संपत्ति उनकी निजी जागीर हो। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं-क्या यही है लखनऊ की पहचान? क्या यही स्मार्ट सिटी का सच है?

सोशल मीडिया पर आक्रोश

सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर खासे नाराज हैं। कई यूजर्स ने इसे “मानसिक दिवालियापन” बताया तो कुछ ने लिखा कि “यही कारण है कि सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित नहीं रह पाती।” एक यूजर ने लिखा -“गमले चुराने वाले ये लोग किसी पार्टी या नेता का नहीं, बल्कि पूरे समाज का आईना हैं।”कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब लोग खुलेआम इस तरह चोरी कर सकते हैं, तो आम दिनों में सार्वजनिक संपत्ति का क्या हाल होता होगा।

लखनऊ की तहजीब पर दाग

लखनऊ को हमेशा से अपनी नज़ाकत, तहज़ीब और संस्कारों के लिए जाना जाता रहा है। यहां के लोग मेहमाननवाजी और शालीन व्यवहार के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन इस घटना ने उस छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है। फूलों के गमले चुराने की यह घटना सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि नागरिक सोच के गिरते स्तर का संकेत है।

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कानूनी कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसे मामलों में उदाहरण पेश नहीं किया गया, तो सार्वजनिक संपत्ति की लूट इसी तरह जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी प्रश्न है। जब तक लोगों में सार्वजनिक संपत्ति को लेकर जिम्मेदारी की भावना नहीं आएगी, तब तक ऐसे घटनाक्रम रुकना मुश्किल है।

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