West Bengal में बीएलओ की गुमशुदगी से मचा हड़कंप… पुलिस ने किया ये खुलासा

Pashchim Bangal News: पश्चिम बंगाल के कटवा विधानसभा क्षेत्र से एक बीएलओ (Booth Level Officer) के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला सामने आया है। लापता बीएलओ अमित कुमार मंडल को लेकर शुरुआती अटकलें चुनावी कार्य और विशेष गहन समीक्षा (SIR) से जुड़े दबाव की लगाई जा रही थीं, लेकिन पुलिस जांच में अब एक अलग ही कहानी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, अमित कुमार मंडल ने करीब 50 लाख रुपये का बैंक लोन लिया था, जिसे उन्होंने शेयर बाजार में निवेश कर दिया। बाजार में भारी नुकसान होने के बाद वे गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में आ गए थे। पुलिस इसी आर्थिक दबाव को उनकी गुमशुदगी की मुख्य वजह मान रही है।

चार दिन से लापता हैं बीएलओ (BLO)
कटवा विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 23 के बीएलओ अमित कुमार मंडल पिछले चार दिनों से लापता हैं। उनके परिजनों ने बताया कि मंगलवार सुबह (23 दिसंबर) करीब 10 बजे अमित बाजार से घर लौटे, मोटरसाइकिल पार्क की और कहा कि वे बीएलओ ड्यूटी से जुड़ी एक बैठक में जा रहे हैं। इसके बाद वे घर नहीं लौटे।

शाम तक संपर्क न होने पर परिवार चिंतित हुआ और रिश्तेदारों के साथ उनकी तलाश शुरू की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद मंगलवार रात कटवा पुलिस स्टेशन में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

घर पर ही मिले मोबाइल, आईडी और SIR दस्तावेज
परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब खोजबीन के दौरान अमित का मोबाइल फोन, बीएलओ पहचान पत्र और SIR से जुड़े दस्तावेज घर पर ही मिले। इससे यह साफ हो गया कि वे बिना किसी जरूरी सामान के घर से निकले थे।

परिजनों का कहना है कि बीएलओ की जिम्मेदारी संभालने के बाद से अमित मानसिक तनाव में रहते थे, जिस कारण उन्हें लगा कि शायद वे चुनावी दबाव नहीं झेल पाए।

पुलिस जांच में सामने आया कर्ज और शेयर बाजार का नुकसान
हालांकि, पुलिस जांच में एक अलग ही पहलू सामने आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमित कुमार मंडल ने हाल ही में एक बैंक से लगभग 50 लाख रुपये का लोन लिया था। इस रकम को उन्होंने शेयर बाजार में लगाया, लेकिन बाजार में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।

नुकसान के बाद उन पर कर्ज का बोझ बढ़ गया और वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए। पुलिस का मानना है कि इसी आर्थिक संकट के चलते उन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया।

SIR या चुनावी दबाव से इनकार
इस मामले के सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे थे। लेकिन पुलिस और प्रशासन दोनों ने साफ किया है कि अमित की गुमशुदगी का विशेष गहन समीक्षा (SIR) या चुनाव आयोग के काम से कोई सीधा संबंध नहीं है।

इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग को भी पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। पुलिस ने आयोग को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें अमित के लापता होने की संभावित वजह बताई गई है।

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पेशे से शिक्षक हैं अमित
अमित कुमार मंडल पेशे से प्राथमिक शिक्षक हैं। वे केतुग्राम के उद्धरणपुर प्राइमरी स्कूल में कार्यरत हैं। वे कटवा-1 ब्लॉक की खजुरडीही पंचायत के बिकिहाट इलाके के निवासी हैं।

स्थानीय लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार व्यक्ति बताते हैं, जिससे उनके अचानक लापता होने की घटना और भी चौंकाने वाली मानी जा रही है।

प्रशासन के लिए बढ़ी मुश्किल
अमित कुमार मंडल के बूथ नंबर 23 में कुल 641 मतदाता पंजीकृत हैं। उन्होंने 33 मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया था। इस बीच पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावे और आपत्तियों की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

बीएलओ की अनुपस्थिति के कारण इस बूथ का चुनावी काम प्रभावित हो रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि अमित तय समय तक नहीं मिलते हैं, तो उनके अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए किसी अन्य अधिकारी को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा।

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तलाश जारी, कई एंगल से जांच
फिलहाल पुलिस अमित कुमार मंडल की तलाश में जुटी हुई है। उनके बैंक लेन-देन, शेयर बाजार निवेश, फोन रिकॉर्ड और परिचितों से संपर्क जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह मामला फिलहाल आर्थिक संकट से उपजे मानसिक दबाव से जुड़ा प्रतीत होता है, न कि किसी चुनावी या प्रशासनिक दबाव से।

कटवा से सामने आया यह मामला न केवल एक व्यक्ति की गुमशुदगी का है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि आर्थिक असफलता और कर्ज का दबाव किस तरह किसी को चरम कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है। पुलिस और प्रशासन को अब अमित कुमार मंडल की सुरक्षित बरामदगी का इंतजार है।

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