
नवरात्रि 2025: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलता है साहस और सफलता, ऐसे करें पूजा
Day 3 of Navratri: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर बुधवार को नवरात्रि का तीसरा दिन मनाया जा रहा है। यह दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित है। माता का यह स्वरूप शांति, साहस और सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है।
भक्त इस दिन विशेष रूप से माता की आराधना कर जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता और सफलता की कामना करते हैं।
ज्योतिषीय पहलू
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। राहुकाल का समय दोपहर 12:13 बजे से 1:43 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और शुभ कार्य राहुकाल से बचकर करने की सलाह दी जाती है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। उनके मस्तक पर अर्द्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिस वजह से उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। देवी का यह स्वरूप साधकों को मानसिक शांति, धैर्य और आत्मविश्वास प्रदान करता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा का महत्व
इस दिन मां चंद्रघंटा की आराधना से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। विशेष मान्यता है कि सूर्योदय से पहले पूजा करने पर माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा में लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने का विशेष महत्व है।
यह भी पढ़ें…
Aaj Ka Rashifal: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें आज का राशिफल
पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, संभव हो तो लाल रंग के कपड़े धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- कलश स्थापना करें और माता को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं—लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, चंदन, रोली और पुष्प।
- मां को फल, मिठाई, खीर या हलवे का भोग लगाएं।
- घी का दीपक और धूप जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- अंत में मां की आरती कर भक्तिपूर्वक प्रार्थना करें।
यह भी पढ़ें…
Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के 9 शुभ दिनों का आरम्भ, जाने पूजा विधि एवं कलश का समय…
उपासना मात्र से मिलता है विशेष फल
मां चंद्रघंटा की उपासना से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि कार्यक्षेत्र और जीवन में भी सफलता प्राप्त होती है। यह दिन साधकों को यह सिखाता है कि साहस और शांति के साथ जीवन में आगे बढ़ना ही सच्ची शक्ति है।
यह भी पढ़ें…





