‘अदृश्य महामारी’ पर सियासी चिंता… Reels और Games की लत पर एक्शन की तैयारी

Bihar Budget Session: बिहार में बच्चों और किशोरों में मोबाइल फोन, रील्स और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत अब गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन चुकी है। इसी मुद्दे को लेकर राज्य की विधानसभा में जोरदार चर्चा हुई, जहां इसे “अदृश्य महामारी” बताते हुए ठोस नीति बनाने की मांग उठी।

JDU विधायक ने उठाया गंभीर सवाल
विधानसभा सत्र के दौरान जेडीयू विधायक समृद्ध वर्मा ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। उनके मुताबिक यह एक ऐसी “अदृश्य महामारी” है, जो राज्य के भविष्य को कमजोर कर रही है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि इस समस्या को केवल पारिवारिक या सामाजिक मुद्दा न मानकर सार्वजनिक नीति के स्तर पर गंभीरता से लिया जाए।

सरकार का आश्वासन
विधायक के सवाल पर जवाब देते हुए नीतीश कुमार की सरकार ने इस विषय को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों में डिजिटल लत को लेकर जागरूकता अभियान और नीतिगत कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने संकेत दिया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण विभाग मिलकर इस दिशा में समन्वित रणनीति तैयार करेंगे।

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क्या हो सकते हैं संभावित कदम
सरकार की ओर से संभावित उपायों में स्कूलों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम, अभिभावकों के लिए मार्गदर्शन, और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता अभियान शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की मदद से परामर्श सेवाएं शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों की चिंता
मनोवैज्ञानिकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार मोबाइल, सोशल मीडिया और गेमिंग के संपर्क में रहने से बच्चों में एकाग्रता की कमी, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और सामाजिक अलगाव बढ़ सकता है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ी के विकास पर पड़ सकता है।

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समाज की भी भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के साथ-साथ अभिभावकों और स्कूलों की भी अहम भूमिका है। बच्चों के लिए संतुलित डिजिटल उपयोग, खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है।

इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई चर्चा से साफ है कि बिहार सरकार अब बच्चों की डिजिटल लत को लेकर गंभीर है और आने वाले समय में इस दिशा में ठोस नीति सामने आ सकती है।

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